अफ़्रीकन चिकन: सॉस अलग रखकर परोसी जाने वाली मकाऊ की भुनी मुर्ग़ी
मुर्ग़ी पूरी होती है, चीरकर चपटी की जाती है, हल्दी और पपरिका से रंगे दही के मैरिनेड में लिपटी हुई भूनते हैं। मूँगफली, नारियल के दूध और लाल मिर्च का गाढ़ा सॉस मुर्ग़ी पर पोता नहीं जाता, बल्कि अलग परोसा जाता है।
प्लेटर पर पूरी मुर्ग़ी चपटी पड़ी है, पपरिका और हल्दी से खाल गहरे लाल-सुनहरे रंग की हो गई है, ऊपर कटा धनिया और दरदरा कुटी शहद में भुनी मूँगफली बिखरी है। बग़ल में नींबू की फाँकें रखी हैं और छोटे कटोरे में मूँगफली और नारियल के दूध वाला चिकना, हल्का नारंगी सॉस है। इसे गालिन्या आफ़्रिकाना कहते हैं, कहीं गालिन्या आ आफ़्रिकाना भी लिखा जाता है, और अंग्रेज़ी में इसे अफ़्रीकन चिकन कहा जाता है।
नाम से लगता है कि यह अफ़्रीका का कोई आम व्यंजन होगा, पर ऐसा नहीं है। इसे मकाऊ के मकानीज़ समुदाय की रसोई, यानी मकानीज़ खाने का व्यंजन माना जाता है। यह गालिन्या काफ़्रियाल से भी अलग व्यंजन है, जिसे मोज़ाम्बीक का बताया जाता है, और पुर्तगाली पिरी-पिरी चिकन से भी; यह लेख इन तीनों को एक-दूसरे का बदल नहीं मानता।
इसकी कोई एक मानक रेसिपी नहीं है। हर रेस्तराँ और हर घर का रूप अलग है। यहाँ जो रूप दिया गया है वह आंतोन्यो एम. जोर्जे दा सिल्वा की मकाएन्से कुइज़ीन: ओरिजिन्स एंड एवोल्यूशन (इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ मकाऊ, 2016) पर चलता है, जिसमें लेखक ने शेफ़ अमेरिको आँजेलो से जुड़े इस व्यंजन को फिर से बनाने की अपनी कोशिश पेश की है। यह उनकी एक कोशिश है, एकमात्र असली नुस्ख़ा नहीं।
हमने यह रेसिपी खुद पकाकर नहीं आज़माई। मिर्चों का तीखापन, सॉस की गाढ़ाई और भूनने का समय आपकी मिर्च, मुर्ग़ी के आकार और आपके ओवन पर निर्भर हैं, इसलिए नीचे दिए समय को सिर्फ़ अंदाज़ा मानें और मुर्ग़ी पकी या नहीं, यह थर्मामीटर से तय करें।
सामग्री (6 लोगों के लिए, स्रोत के अनुसार)

मूँगफली, जैतून का तेल और नारियल का दूध एक से ज़्यादा जगह आते हैं, इसलिए हर इस्तेमाल की अपनी पंक्ति है।
बर्तन और औज़ार
- मुर्ग़ी खोलने के लिए रसोई की कैंची या हड्डी निकालने वाला चाकू
- ओवन में रखने लायक़ धातु की भूनने की ट्रे
- सॉसपैन
- ब्लेंडर
- तुरंत तापमान दिखाने वाला थर्मामीटर
- साफ़ डिस्पोज़ेबल किचन टिशू
- सिर्फ़ कच्ची मुर्ग़ी के लिए अलग रखा कटिंग बोर्ड, डिब्बे और औज़ार
माप, चुनाव और विकल्प
स्रोत में कप, बड़े चम्मच और छोटे चम्मच हैं। किताब में छपी बदलने की तालिका के मान मिले-जुले हैं (1 कप = 250 मिली, 1/2 कप = 118 मिली, 1/4 कप = 59 मिली), इसलिए वह कप का कोई एक मानक तय नहीं करती, और यह लेख स्रोत के कप को अमेरिकी कप नहीं कहता। चरणों को समझने के लिए यहाँ संपादकीय तौर पर 1 कप = 240 मिली, 1 बड़ा चम्मच = 15 मिली और 1 छोटा चम्मच = 5 मिली माना गया है। इस हिसाब से 1/2 कप 120 मिली और 1/4 कप 60 मिली है। ये आयतन हैं, वज़न नहीं।
दो तेल, दो काम। मैरिनेड का 1/4 कप जैतून का तेल सिर्फ़ मैरिनेड में जाता है। सॉस का 1/4 कप सॉस का इकलौता तेल है: भूनने के लिए लगभग 15 मिली (1 बड़ा चम्मच) और पीसने के लिए लगभग 45 मिली, यानी अलग से तेल नहीं डालना।
मूँगफली के दो हिस्से। 1 कप शहद में भुनी मूँगफली सॉस में जाती है; 1/2 कप दरदरा कुटकर आख़िर में ऊपर बिखेरी जाती है।
जैतून का तेल। पहला चुनाव पुर्तगाली जैतून का तेल है। साधारण एक्स्ट्रा-वर्जिन जैतून का तेल भी चल जाता है, स्वाद में थोड़ा फ़र्क़ रहेगा।
मिर्च। बनी हुई मुर्ग़ी और सॉस का तीखापन इस पर है कि आप कौन-सी और कितनी लाल मिर्च लेते हैं। हल्की मिर्च या कम मात्रा चुनने पर व्यंजन कम तीखा बनेगा, पर असर कितना होगा, यह यहाँ नापा नहीं गया।
किसका विकल्प नहीं चलता। नारियल का दूध या मूँगफली हटा दें तो व्यंजन इस रूप से दूर चला जाता है। वह अलग रेसिपी है, कोई विकल्प नहीं।
इस रेसिपी में मूँगफली, दूध (दही) और मुर्ग़ी है। शहद में भुनी मूँगफली एक प्रोसेस्ड चीज़ है, इसलिए लेबल पर बाक़ी सामग्री ज़रूर देखें। मूँगफली शहद में भुनी है, इसलिए 1 साल से छोटे बच्चों को यह व्यंजन न दें; एक साल से कम उम्र के बच्चों को शहद नहीं देना चाहिए, और आम गरम करना या पकाना इस सावधानी को नहीं हटाता।
विधि: पहले सॉस बनाएँ, फिर मैरिनेड और भूनना
चरण 1–3 में सॉस बनता है, जो अलग परोसा जाता है। चरण 4–5 में मुर्ग़ी तैयार होकर कम से कम 3 घंटे मैरिनेड में रहती है, हो सके तो रात भर। चरण 6–8 में भूनना और सजाना है। भूनते समय सॉस मुर्ग़ी पर कभी नहीं जाता।
कच्ची मुर्ग़ी के बोर्ड, डिब्बे और औज़ार बाक़ी खाने की चीज़ों से अलग रखें, बने सॉस से भी। कच्ची मुर्ग़ी छूने के बाद हाथ और औज़ार धोएँ। जिन बर्तनों या औज़ारों को कच्ची या मैरिनेड वाली मुर्ग़ी छू चुकी, उन्हें पकी मुर्ग़ी के लिए न लें, और बचा मैरिनेड सॉस में न मिलाएँ, जो बिना और गरम किए परोसा जाता है।
कुछ गड़बड़ हो तो
| हालत | क्या देखें या करें |
|---|---|
| 45 मिनट में खाल अच्छी तरह भूरी है, पर सबसे मोटा हिस्सा 75°C से नीचे है | भूनते रहें और दोबारा जाँचें, जब तक बीच का तापमान कम से कम 75°C पर 1 मिनट न रहे। रंग पकने की जाँच नहीं है |
| मैरिनेड लगाते समय खाल फटने लगे | खाल सिर्फ़ थोड़ी उठाएँ और नीचे मैरिनेड लगाएँ; खाल को मांस से खींचकर अलग करने की ज़रूरत नहीं |
| पीसने का समय आया पर सॉस अब भी गरम है | पहले ठंडा होने दें, और ब्लेंडर की तापमान व मात्रा की सीमा में रहें |
| कटोरे में मैरिनेड बचा है | फेंक दें। सॉस में न मिलाएँ और डिप की तरह इस्तेमाल न करें |
| व्यंजन मन से ज़्यादा तीखा बना | अगली बार लाल मिर्च का प्रकार और मात्रा बदलें; तीखापन मिर्च के हिसाब से बदलता है |
बचा खाना साफ़, उथले डिब्बों में बाँटें, जल्दी ठंडा करके फ्रिज में रखें। आम अंदाज़े के तौर पर 75°C या उससे ऊपर तक गरम करें। इस खास रेसिपी के लिए रखने की कोई सुरक्षित अवधि तय नहीं है।
इसी रेसिपी के भीतर बदलाव
पूरी मुर्ग़ी की जगह चिकन जाँघ। स्रोत पूरी मुर्ग़ी के विकल्प में 8 चिकन जाँघ देता है। उनके लिए अलग भूनने का समय नहीं दिया गया, इसलिए वही थर्मामीटर जाँच रखें: बीच में कम से कम 75°C, 1 मिनट तक।
स्रोत का परोसने का सुझाव। विधि में दा सिल्वा सुझाते हैं कि मुर्ग़ी के साथ भुने टमाटर और हल्दी में उबले कटे आलू परोसें। सामग्री की सूची में इनकी कोई मात्रा नहीं दी गई, इसलिए ये ऊपर की रेसिपी का हिस्सा नहीं हैं; इन्हें परोसने का आइडिया मानें, इस पेज से नापकर बनाने की चीज़ नहीं।
मकाऊ के दूसरे रूप। मकाऊ में रेसिपियाँ अलग-अलग हैं। अमेरिकन हिस्टोरिकल एसोसिएशन के एक लेख में अनाबेल जैक्सन की टेस्ट ऑफ़ मकाऊ से एक अलग घरेलू रूप दिया गया है, जिसका नुस्ख़ा अलग है। वह अलग रेसिपी है, इसलिए उसकी मात्राएँ इसमें नहीं मिलाई गई हैं।
व्यंजन कहाँ से आया, और क्या अनिश्चित है
गालिन्या आफ़्रिकाना को मकानीज़ व्यंजन माना जाता है। मकाऊ में यह नाम कई अलग तैयारियों के लिए चलता है, और लिखने वाले इसे परोसने के अलग-अलग तरीक़े बताते हैं। मकानीज़ रसोई पर शोध में कहा गया है कि आज इसके कई रूप हैं, जिनमें मूँगफली और टमाटर वाले रूप भी शामिल हैं।
इसकी उत्पत्ति तय नहीं है। एक बहुत दोहराया जाने वाला क़िस्सा कहता है कि व्यंजन पोउसादा दे मकाऊ के शेफ़ अमेरिको आँजेलो ने बनाया, और दूसरा इसे पुर्तगाल की अफ़्रीकी कॉलोनियों की यात्रा से जोड़ता है। मोज़ाम्बीक और गोवा से जुड़ाव की भी चर्चा होती है। खान-पान के इतिहास पर शोध और पाक-पुस्तक दोनों इन्हें व्यंजन के बारे में सुनाई जाने वाली कहानियाँ मानते हैं, स्थापित तथ्य नहीं, और यहाँ कोई पक्की तारीख़ या जन्मस्थान नहीं दिया गया है।
दा सिल्वा खुद लिखते हैं कि हर रेस्तराँ की रेसिपी अलग है और वे अपने रूप को खोए स्वाद को वापस पाने की एक कोशिश बताते हैं। अनाबेल जैक्सन का शोध भी मकानीज़ अफ़्रीकन चिकन को गालिन्या पिरी पिरी से मिला देने के ख़िलाफ़ चेतावनी देता है। इस व्यंजन को अपने इतिहास वाली मकानीज़ तैयारी मानकर पढ़ें तो यह उन व्यंजनों से अलग रहता है जिनकी ओर इसका नाम इशारा करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या अफ़्रीकन चिकन अफ़्रीका का व्यंजन है?
नहीं। गालिन्या आफ़्रिकाना को मकाऊ में मकानीज़ रसोई का व्यंजन माना जाता है। कहानियाँ इसकी प्रेरणा को पुर्तगाल की अफ़्रीकी कॉलोनियों से जोड़ती हैं, और मोज़ाम्बीक व गोवा से जुड़ाव पर चर्चा होती है, पर ये सिद्धांत हैं, तय उत्पत्ति नहीं।
क्या यह पिरी-पिरी चिकन या गालिन्या काफ़्रियाल जैसा ही है?
नहीं। यह लेख इसे पुर्तगाली पिरी-पिरी चिकन या गालिन्या काफ़्रियाल जैसा व्यंजन नहीं मानता, जिसे मोज़ाम्बीक का बताया जाता है।
जब स्रोत में मुर्ग़ी धोई जाती है, तो इस रेसिपी में क्यों नहीं?
कच्ची मुर्ग़ी धोने से संदूषण सिंक और आस-पास की सतहों पर फैल सकता है। यह लेख स्रोत के धोने वाले चरण की जगह साफ़ डिस्पोज़ेबल किचन टिशू से मुर्ग़ी पोंछकर सुखाने का तरीक़ा रखता है। यह संपादकीय बदलाव है, मूल विधि नहीं।
क्या 425°F पर 45 मिनट काफ़ी होंगे?
स्रोत 45 मिनट अंदाज़े के तौर पर देता है, पर मुर्ग़ी का वज़न नहीं बताता, और ओवन अलग-अलग होते हैं। सबसे मोटे हिस्से में थर्मामीटर लगाएँ और देखें कि वह 1 मिनट तक कम से कम 75°C पर पहुँचे; ज़रूरत हो तो और भूनें।
क्या भूनने से पहले सॉस मुर्ग़ी पर लगाना चाहिए?
नहीं। इस रूप में मुर्ग़ी सिर्फ़ मसालेदार दही के मैरिनेड के साथ भुनती है, और मूँगफली-नारियल का सॉस मेज़ पर अलग परोसा जाता है।
क्या मदीरा को 2 मिनट उबालने से शराब निकल जाती है?
इसकी गारंटी नहीं है। सॉस उबाल आने के बाद लगभग 2 मिनट उबलता है, जिससे शराब पूरी तरह जाना तय नहीं होता।
क्या बच्चे इसे खा सकते हैं?
1 साल से छोटे बच्चों को न दें, क्योंकि शहद में भुनी मूँगफली में शहद है। पकाने से यह सावधानी नहीं हटती। व्यंजन में मूँगफली और दूध (दही) भी है।
संदर्भ
- आंतोन्यो एम. जोर्जे दा सिल्वा, मकाएन्से कुइज़ीन: ओरिजिन्स एंड एवोल्यूशन, इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ मकाऊ, 2016, पृ. 126–128 (ऑनलाइन ट्रांसक्रिप्शन, मकाऊ वर्चुअल लाइब्रेरी)। रेसिपी की सामग्री, मात्राएँ, विधि, 6 लोगों की मात्रा और भूनने के निर्देश; लेखक का यह कथन कि रेस्तराँ के हिसाब से रेसिपियाँ अलग हैं; और बनने की कहानी तथा मोज़ाम्बीक / गोवा के जुड़ाव की अनिश्चितता। https://www.macaudata.mo/showbook?bno=b001162
- आइज़क बोछियाओ यान, "मकानीज़ गालिन्या आ आफ़्रिकाना – मकाओ से पुर्तगाली औपनिवेशिक अफ़्रीका तक का सफ़र," पर्सपेक्टिव्स ऑन हिस्ट्री, अमेरिकन हिस्टोरिकल एसोसिएशन, 2023-07-12। मकाऊ में व्यंजन की जगह, इसके अलग-अलग परोसने के रूप, उत्पत्ति की कई कहानियाँ, और अनाबेल जैक्सन को जोड़ी गई एक अलग घरेलू रेसिपी। https://www.historians.org/perspectives-article/macanese-galinha-africana-time-traveling-to-portuguese-colonial-africa-from-macao-july-2023/
- अनाबेल जैक्सन, क्लासिफ़िकेशन्स एंड रेप्रेज़ेंटेशन्स ऑफ़ मकानीज़ कुइज़ीन: फ़्रॉम डोमेस्टिक, डॉक्टरेट शोध-प्रबंध, गोल्डस्मिथ्स, यूनिवर्सिटी ऑफ़ लंदन, 2023। व्यंजन के मकानीज़ होने की बात, अमेरिको आँजेलो वाली उत्पत्ति की कहानी पर संदेह, आज के रूपों की विविधता, और गालिन्या पिरी पिरी से अंतर। https://research.gold.ac.uk/id/eprint/34016/1/ICCE_thesis_JacksonA_2023.pdf
- जापान का स्वास्थ्य, श्रम एवं कल्याण मंत्रालय, "कैंपिलोबैक्टर खाद्य विषाक्तता से बचाव (प्रश्नोत्तर)" (カンピロバクター食中毒予防について(Q&A))। मुर्ग़ी को बीच में कम से कम 75°C पर 1 मिनट या उससे ज़्यादा गरम करना, कच्ची या अधपकी मुर्ग़ी से बचना, और कच्ची मुर्ग़ी के औज़ार व डिब्बे अलग रखना, हाथ व औज़ार धोना। https://www.mhlw.go.jp/stf/seisakunitsuite/bunya/kenkou_iryou/shokuhin/syokuchu/campylobacterqa.html
- जापान का स्वास्थ्य, श्रम एवं कल्याण मंत्रालय, "घर में खाद्य विषाक्तता से बचाव" (家庭での食中毒予防)। घर पर 75°C पर 1 मिनट या उससे ज़्यादा गरम करना, संदूषण फैलने से रोकना, बचे खाने को उथले हिस्सों में जल्दी ठंडा करना, और अंदाज़े के तौर पर 75°C या उससे ऊपर तक दोबारा गरम करना। https://www.mhlw.go.jp/stf/seisakunitsuite/bunya/kenkou_iryou/shokuhin/syokuchu/01_00008.html
- जापान का स्वास्थ्य, श्रम एवं कल्याण मंत्रालय, "शहद एक साल की उम्र के बाद ही दें" (ハチミツを与えるのは1歳を過ぎてから。)। 1 साल से छोटे बच्चों को शहद या शहद वाली चीज़ें न देना, और यह कि आम गरम करना या पकाना यह सावधानी नहीं हटाता। https://www.mhlw.go.jp/stf/seisakunitsuite/bunya/0000161461.html













