अब्लो: भाप से उठी छोटी खमीरी टिकिया
इन टिकियाओं में अनाज की हल्की महक, यीस्ट से आई हल्की-फुल्की बनावट, धीमी मिठास और भाप से मिली नमी है। पहले मक्के का आटा पकाएँ, उसे पूरी तरह ठंडा होने दें, और घोल को भाप में जाने से पहले फूलने दें।
सोचिए, भाप का ढक्कन उठता है और धुएँ में से छोटी-छोटी हल्की टिकिया बाहर निकलती हैं। ऊपर से गोल, भीतर से नरम। मेज़ पर वे तली मछली, प्याज़, मिर्च और टमाटर या ग्बोमा की चटनी के साथ रखी रहती हैं। यह दृश्य किसी के आँखों देखा ब्यौरा नहीं है। यह बेनिन की सांस्कृतिक संस्था APPEL.Bénin और दुकानदार NKOSI के बताए खाने के तरीक़ों से जोड़कर बनाया गया है। अब्लो वही भाप में पका व्यंजन है जो इन चटनियों को सोख लेता है।
अब्लो (अबोलो भी लिखा जाता है) दक्षिणी बेनिन और टोगो के तट की नरम, लचीली और भाप में पकी रोटीनुमा चीज़ है, जिसे मुख्य अनाज के रूप में या नाश्ते-भर के रूप में खाया जाता है। अनाज का घोल खमीरा होता है, छोटे साँचों में बाँटा जाता है और भाप में पकाया जाता है। Université d'Abomey-Calavi के एक अध्ययन में दक्षिणी बेनिन में इसे बनाने के कई तरीक़े दर्ज हैं: एक मक्के पर आधारित, एक चावल पर आधारित, और एक जिसमें दोनों मिलते हैं। पूरे देश के लिए कोई एक ही नुस्ख़ा असली अब्लो नहीं है। यह लेख एक प्रकाशित घरेलू संस्करण पर चलता है और साफ़ बताता है कि वह पारंपरिक तरीक़ों से कहाँ अलग है।
मक्का, चावल और मिला-जुला: दक्षिणी बेनिन में अब्लो बनाने के तरीक़े
पारंपरिक मक्के वाले तरीक़े में आधार मावे होता है, यानी प्रसंस्कृत मक्के का एक बीच का गूदा जो अपने आप खमीरा हो जाता है। असोग्बा और उनके साथियों का अध्ययन बताता है कि इस तरह बनी अब्लो भाप में जाने से पहले बेकर के यीस्ट के साथ एक और खमीरावट से गुज़रती है। खमीरावट घोल में अम्लीयपन लाती है और CO2 बनाती है, जिससे टिकिया में हवा के छोटे-छोटे छेद बनते हैं। ACED के प्रकाशित शोध-सार में मक्के वाले प्रकार को मूल और चावल वाले प्रकार को बाद का तकनीकी बदलाव माना गया है। इसमें उत्पादन के तीन प्रकार गिनाए गए हैं: मक्का, चावल, और 2/3 मक्का तथा 1/3 चावल का मेल।
उसी अध्ययन में यह भी दर्ज है कि चावल वाली अब्लो कोटोनू और पोर्टो-नोवो में आम हो गई है, कुछ हद तक इसलिए कि उसका तरीक़ा छोटा है। कोमे में मक्के वाला प्रकार चलता रहा और मिले-जुले प्रकार भी दिखते हैं। ACED के सार में यह भी जुड़ता है कि अध्ययन में शामिल उपभोक्ताओं ने चावल वाले उत्पादों को ज़्यादा पसंद किया।
अब्लो का रोज़मर्रा की ज़िंदगी में भी जगह है। पहले के अध्ययनों के आधार पर असोग्बा और साथी बताते हैं कि इसे नाश्ते में और हल्के नाश्ते के रूप में खाया जाता है। यह नामकरण, शादियों और स्थानीय उत्सवों में भी आता है, और इसे बनाना-बेचना महिला उत्पादकों की आजीविका का हिस्सा है। ये बातें उन इलाक़ों और समय के बारे में हैं जिन्हें शोध ने घेरा था, आज की हर मेज़ का ब्यौरा नहीं। देश के और व्यंजन देखने हों तो बेनिन का पन्ना देखें।
APPEL.Bénin एक कहानी भी बताता है जो अब्लो को गुइन द'आनेहो और पिएरे साक्रे उत्सव से जोड़ती है। साइट इसे मौखिक परंपरा के रूप में पेश करती है, और हमारे पास इसका कोई स्वतंत्र ऐतिहासिक स्रोत नहीं है, इसलिए इसे साइट का कहा हुआ मानें, व्यंजन की स्थापित उत्पत्ति नहीं।
चावल के आटे, मक्के के आटे और कॉर्नस्टार्च वाली घर की अब्लो की सामग्री

यह मिले हुए आटों वाली घरेलू रेसिपी है। यह बेकर के यीस्ट से बनने वाला छोटा तरीक़ा है, मावे वाला नहीं। 4 लोगों के लिए।
सेकाई गोहान ने इस रेसिपी को अभी रसोई में परखा नहीं है। मात्राएँ, "4 लोगों के लिए", फूलने का समय और लगभग 20 मिनट की भाप हमारे नापे हुए नतीजे नहीं हैं, और ये सुरक्षा की गारंटी भी नहीं हैं।
बर्तन और सामान
- मक्के का आटा पकाने के लिए ढक्कनदार बड़ा बर्तन
- फेंटनी या लकड़ी की कलछी
- यीस्ट के लिए छोटा कटोरा
- फूलने के लिए ढक्कनदार डिब्बा जिससे गैस निकल सके (सीलबंद काँच का जार नहीं)
- भाप का बर्तन या कुसकुस का बर्तन (couscoussier), साथ में उसके लिए पानी और ऊपर से डालने के लिए उबलता पानी
- कई छोटे धातु के साँचे (छोटे एल्युमिनियम के साँचे)
- साँचों में अस्तर लगाने के लिए खाने योग्य केले का पत्ता या एल्युमिनियम फ़ॉइल। इस संस्करण में केले का पत्ता लगता है और तेल नहीं
- एक पतली बाँस की सींक
आटे और यीस्ट चुनना
मक्के का आटा और कॉर्नस्टार्च एक चीज़ नहीं हैं। इस रेसिपी में farine de maïs मक्के का आटा है। वह पहले पानी के साथ पकता है। Fécule de maïs या Maïzena कॉर्नस्टार्च है, जो बाद में चावल के आटे के साथ जाता है। कुछ देशों में कॉर्नस्टार्च "cornflour" नाम से बिकता है, इसलिए लेबल देख लें। मक्के के आटे के उत्पाद पिसाई की बारीकी और गाढ़ा करने के तरीक़े में अलग होते हैं, इसलिए कोई एक उत्पाद पक्का मेल नहीं है। कॉर्नस्टार्च की जगह अपने आप आलू का स्टार्च न लगाएँ।
साधारण, ग़ैर-चिपचिपे चावल से बना आटा लें। गेहूँ का आटा लगाने पर आप इस संस्करण से दूर चले जाएँगे, जिसमें गेहूँ है ही नहीं।
इस लेख में सूखा बेकर यीस्ट लगता है। उत्पाद अलग-अलग होते हैं, इसलिए यीस्ट को कैसे जगाना है और पानी कितना गुनगुना हो, यह आपके यीस्ट के लेबल से लें।
इस रेसिपी में चावल, मक्का, यीस्ट, चीनी और नमक है, और APPEL.Bénin वाले संस्करण में गेहूँ का आटा नहीं है। सामग्री की सूची और एक ही कारख़ाने में बनने की बात हर उत्पाद में अलग होती है, और कुछ यीस्ट उत्पादों में अतिरिक्त चीज़ें होती हैं, इसलिए हर लेबल जाँचें।
बनाने का तरीक़ा: दलिया ठंडा करें, फूलने दें, फिर भाप दें
कुछ और डालने से पहले दलिया पूरी तरह ठंडा होने तक रुकें। फूलना तब पूरा हुआ मानें जब घोल का आयतन बढ़ गया हो। भाप का समय एक अंदाज़ा है और आपके साँचों के आकार के साथ बदलता है।
जब घोल नहीं फूलता, चिपचिपा रह जाता है या साँचे से नहीं निकलता

| दिक़्क़त | क्या देखें | क्या करें |
|---|---|---|
| घोल मुश्किल से फूला | कि यीस्ट तब डाला गया जब दलिया अभी गरम था, रसोई का तापमान, यीस्ट का उत्पाद, आटों की पिसाई | अगली बार दलिया पूरी तरह ठंडा होने तक रुकें। फूलना आयतन के बढ़ने से तय करें, सिर्फ़ समय से नहीं |
| बीच गीला या चिपचिपा है | साँचे का आकार, साँचे कितने भरे हैं, भाप हर टिकिया तक पहुँच रही है या नहीं | भाप देते रहें और सींक वाली जाँच दोहराएँ। साँचों को एक ही परत में रखें और पानी भरा रखें |
| टिकिया भारी लगती हैं | भाप के दौरान ढक्कन बार-बार उठाना, साँचे बहुत तंग रखना | शुरू में ढक्कन खोलने से बचें। साँचों के बीच जगह छोड़ें ताकि भाप चल सके |
| टिकिया साँचों से चिपक जाती हैं | अस्तर न होना या अधूरा होना | ठंडा होने दें, फिर किनारों को ढीला करें। साँचों में केले का पत्ता या फ़ॉइल बिछाएँ, जो स्रोत में दिए विकल्प हैं, और अपने आप तेल या काग़ज़ न लगाएँ |
शोध ने कारीगरी के उत्पादन का अध्ययन किया, घर की रसोई का नहीं, और उसके खमीरावट के समय और भाप की शर्तें इस मिले-जुले आटे वाली रेसिपी पर लागू नहीं होतीं। इस संस्करण पर लंबी मावे खमीरावट न लगाएँ।
विकल्प
इनमें से हर एक ऊपर की रेसिपी से अलग है। इनमें से कोई इन मात्राओं के साथ परखा नहीं गया, इसलिए इन्हें अलग संस्करण मानें।
- कम चीनी, नमकीन खाने के साथ खाने के लिए: चीनी घटाने से प्रकाशित रेसिपी का स्वाद बदलता है, और शायद उसका फूलना भी। बिना परखा हुआ, और कोई तय नुस्ख़ा नहीं।
- केले के पत्ते में लपेटकर: घोल को साँचों में अस्तर लगाने की जगह केले के पत्ते में लपेटने का ज़िक्र NKOSI जैसे इलाक़ाई ब्यौरों में है। इस मेल के साथ यह आज़माया नहीं गया, और इससे ख़ुशबू, भाप का घोल तक पहुँचना और आकार बदल जाएँगे।
- मुख्यतः चावल: Université d'Abomey-Calavi का अध्ययन पुष्टि करता है कि चावल पर आधारित तरीक़ा मौजूद है। उसकी मात्राएँ यहाँ नहीं दी गई हैं और उन्हें इस रेसिपी में न मिलाएँ।
- मुख्यतः मक्का: पारंपरिक मक्के वाला प्रकार मावे पर खड़ा है। हमारी सामग्री में उसकी पूरी घरेलू रेसिपी नहीं है, इसलिए सिर्फ़ आटे बदलकर वहाँ नहीं पहुँचा जा सकता।
- इलाक़े के चावल और मक्का के अनुपात: ACED 2/3 मक्का और 1/3 चावल से बने एक प्रकार का ज़िक्र करता है। वह अलग उत्पादन तरीक़ा बताता है। इसका मतलब यह नहीं कि यहाँ आटे का अनुपात बदलकर उसे फिर से बनाया जा सकता है।
मछली और टमाटर-मिर्च की चटनी के साथ अब्लो खाना
APPEL.Bénin अब्लो के साथ खाने की चीज़ों में तली मछली, प्याज़, मिर्च, ग्बोमा की चटनी और टमाटर की चटनी गिनाता है, और NKOSI भी टमाटर-मिर्च की चटनी और मछली का ज़िक्र करता है। टिकिया का हल्का, अनाज वाला स्वाद इसी के लिए है कि वह चटनी को सोख ले।
NKOSI व्यंजन को अब्लो या अबोलो कहता है और उसे टोगोई और बेनिनी दोनों बताता है। अब्लो कैसे खाई जाती है और उसमें कौन-से आटे जाते हैं, यह जगह-जगह बदलता है, इसलिए इसे सिर्फ़ बेनिन का न मानें। घाना में अबोलो नाम की चावल की टिकिया भी जानी जाती है। सिर्फ़ नाम से यह नहीं निकलता कि दोनों एक ही रेसिपी हैं या उनकी उत्पत्ति एक है, और हमारे स्रोत इस सवाल को तय नहीं करते।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या अब्लो और अबोलो अलग व्यंजन हैं?
दोनों वर्तनी चलती हैं। हमारे पास कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं है जो इलाक़ाई फ़र्क़ों को इतना अच्छे से घेरता हो कि इससे आगे कुछ कहा जा सके। सिर्फ़ मिलता-जुलता नाम दो रेसिपियों को एक नहीं बनाता, ख़ासकर देशों के पार।
क्या मैं अपने आप खमीरा होने वाला मक्के वाला संस्करण बना सकता हूँ?
शोध में दर्ज मावे का तरीक़ा अलग रेसिपी है, जिसमें अनाज को प्रसंस्कृत करना और एक बीच का गूदा बनाना शामिल है। उसकी सामग्री या समय इस छोटे संस्करण में न मिलाएँ। उसका घरेलू संस्करण बनाने के लिए ज़्यादा विशेषज्ञ स्रोत चाहिए।
अब्लो मीठी है या मुख्य अनाज है?
इस संस्करण में 100 ग्राम चीनी है, और APPEL.Bénin भी इसे मछली और चटनियों के साथ खाने का ज़िक्र करता है। कम मीठी चाहिए तो कम चीनी वाला विकल्प देखें, जो परखा नहीं गया है।
बची अब्लो कैसे रखें या दोबारा गरम करें?
स्रोत कोई भंडारण अवधि या दोबारा गरम करने का तरीक़ा नहीं देता, इसलिए हम भी नहीं सुझाते। अब्लो ताज़ी बनी ही सबसे अच्छी लगती है। बची रखनी हो तो जापान के स्वास्थ्य, श्रम एवं कल्याण मंत्रालय की घरेलू खाद्य-सुरक्षा सलाह मानें। छोटे, उथले हिस्सों में बाँटें, जल्दी ठंडा करें और तुरंत फ्रिज में रखें। दोबारा गरम करते समय 75°C या उससे ऊपर तक गरम करें। वही सलाह घर के खाने के लिए एक आम लक्ष्य के तौर पर बीच का तापमान 75°C और कम से कम 1 मिनट बताती है। यह आम स्वच्छता सलाह है और इस रेसिपी के साथ जाँची नहीं गई है। कमरे के तापमान पर फूला घोल भंडारण के बारे में कोई गारंटी नहीं देता, इसलिए घोल बाद के लिए न रखें।
संदर्भ
- असोग्बा और साथी, "Effet des technologies de production traditionnelle sur qualité de Ablo: un pain cuit à la vapeur au Bénin," Annales des sciences agronomiques, Université d'Abomey-Calavi, 2016. दक्षिणी बेनिन के मक्का, चावल और मिले-जुले तरीक़ों, मावे, खमीरावट और भाप, इलाक़ाई फ़र्क़ों, और रोज़ के खाने, उत्सवों और उत्पादकों की आजीविका में अब्लो की जगह को घेरता है। अध्ययन ने कारीगरी के उत्पादन को देखा, घरेलू रेसिपियों को नहीं। https://revues.uac.bj/index.php/asa/article/download/129/113/231
- ACED (African Centre for Evidence), "Evaluation des procédés traditionnels de production du ablo, un pain humide cuit à la vapeur, au Bénin." 2011 के एक अध्ययन का सार: मक्का मूल प्रकार के रूप में, चावल बदलाव के रूप में, 2/3 मक्का और 1/3 चावल सहित उत्पादन के तीन प्रकार, हाथ लगाने के दौरान फिर से संक्रमण का ख़तरा, और चावल वाले उत्पादों के लिए उपभोक्ताओं की पसंद। https://acedafrica.org/evidences/evaluation-des-procedes-traditionnels-de-production-du-ablo-un-pain-humide-cuit-a-la-vapeur-au-benin-3/
- APPEL.Bénin (Yrédée B. Challa), "Art culinaire du Bénin: l'Ablo," 2020. यहाँ इस्तेमाल हुई रेसिपी का स्रोत (सारी मात्राएँ, चरणों का क्रम, फूलने के अंदाज़े और लगभग 20 मिनट की भाप), अब्लो खाने के तरीक़े, और इसकी उत्पत्ति के बारे में मौखिक परंपरा, जो साइट के नाम पर है। https://appelbenincom.wordpress.com/2020/10/18/art-culinaire-du-benin-lablo/
- NKOSI, "Ablo, abolo : la recette togolaise et béninoise du pain de maïs vapeur." अब्लो और अबोलो नामों, टोगो और बेनिन के संदर्भ, और टमाटर-मिर्च की चटनी व मछली के साथ परोसने के लिए इस्तेमाल हुआ। इसकी अपनी रेसिपी इस रेसिपी में नहीं मिलाई गई। https://www.nkosiagro.com/blogs/culture-africaine/recette-des-abolo-ablo
- जापान का स्वास्थ्य, श्रम एवं कल्याण मंत्रालय, "家庭での食中毒予防" (घर में खाद्य विषाक्तता से बचाव). बीच का तापमान 75°C और कम से कम 1 मिनट गरम करने, एक-दूसरे में संक्रमण से बचने, बचे खाने को छोटे उथले हिस्सों में ठंडा करने, और 75°C या उससे ऊपर तक दोबारा गरम करने पर आम घरेलू सलाह। https://www.mhlw.go.jp/stf/seisakunitsuite/bunya/kenkou_iryou/shokuhin/syokuchu/01_00008.html














