इंडोनेशियाई व्यंजनों की थाली: नासी गोरेंग, साते, टेम्पे और इलाक़ाई ख़ासियतें
पाक शैलीइंडोनेशिया

इंडोनेशियाई व्यंजन गाइड: रेंडांग से घर की रेसिपी तक

इंडोनेशियाई खाने की गाइड: रेंडांग, नासी गोरेंग, साते, गादो-गादो और सोतो, स्वाद के पाँच स्तंभ (केचप मानिस, तेरासी, सांबल, टेम्पे, गलांगल), जावा, सुमात्रा, बाली और सुलावेसी के इलाक़ाई फ़र्क़, पीछे का इतिहास, और मुश्किल से मिलने वाली सामग्री के आसान विकल्प।

क्या आप जानते हैं कि दुनिया ने एक ही देश के व्यंजनों को "पहला" और "दूसरा" स्थान दिया?

2011 में दुनिया के सबसे बड़े यात्रा मीडिया में से एक CNN ने पाठकों के मतदान से "दुनिया के 50 सबसे स्वादिष्ट खाने" की सूची छापी। नतीजा चौंकाने वाला था। पहला और दूसरा, दोनों स्थान एक ही देश के व्यंजनों को मिले।

पहला: रेंडांग (Rendang), पश्चिमी सुमात्रा की सूखी बीफ़ करी दूसरा: नासी गोरेंग (Nasi Goreng), इंडोनेशिया का तला चावल

वह देश इंडोनेशिया है, दुनिया की चौथी सबसे बड़ी आबादी वाला द्वीप-समूह। इंडोनेशियाई खाना दुनिया को इतना क्यों लुभाता है? 17,000 से ज़्यादा द्वीपों से पैदा हुई विविधता और भारत, चीन, अरब, नीदरलैंड और स्थानीय लोगों की खान-पान परंपराओं के सदियों में घुल-मिल जाने से बने जटिल स्वाद की वजह से। "इंडोनेशियाई खाना" एक वाक्यांश में समेटी जा सकने वाली चीज़ नहीं है।

यह लेख इंडोनेशियाई खाने की पूरी तस्वीर इलाक़े और सामग्री के हिसाब से सँवारता है, और उन व्यंजनों तक ले जाता है जो आप आज रात घर पर बना सकते हैं।

इस लेख का उपयोग कैसे करें

इंडोनेशियाई खाने की "परिचय गाइड" के रूप में पूरी तस्वीर समझें। अलग-अलग रेसिपी का विस्तार हर लिंक वाले पन्ने पर देखें। नासी गोरेंग की रेसिपी यहाँ समझाई जा चुकी है।

इंडोनेशिया का स्ट्रीट फ़ूड। ठेलों की क़तार वाले रात के बाज़ार में साते और नासी गोरेंग परोसे जाते हुए
17,000 द्वीपों वाले इंडोनेशिया में दुनिया की सबसे बड़ी खान-पान विविधताओं में से एक है

इंडोनेशियाई खाने को समझने के "पाँच स्तंभ"

इंडोनेशिया के स्ट्रीट फ़ूड ठेले पर परोसा तला हुआ व्यंजन
इंडोनेशिया का स्ट्रीट फ़ूड। जावा के ठेलों पर तले हुए व्यंजन सबसे लोकप्रिय श्रेणी हैं

इंडोनेशियाई खाना समझने के पाँच मुख्य शब्द हैं। इन्हें पकड़ लें तो पहली बार खाए व्यंजन में भी "अच्छा, ऐसा है" का एहसास होने लगता है।

1. केचप मानिस (Kecap Manis): मीठे सोया सॉस का जादू

इंडोनेशियाई खाने का "चेहरा" कही जाने वाली चटनी केचप मानिस है। यह उबाले गए गुड़-शीरे की गाढ़ी मिठास और सोया सॉस के स्वाद का मिश्रण है, और नासी गोरेंग, साते, बाकमी (इंडोनेशियाई तले नूडल) जैसे राष्ट्रीय व्यंजनों के लिए ज़रूरी है।

"केचप" शब्द की उत्पत्ति पर कई मत हैं, पर सबसे प्रचलित यह है कि हॉक्किएन भाषा का "kê-tsiap" (मछली या सोयाबीन का ख़मीरा रस) मलय-इंडोनेशियाई में "kecap" बना, डच और अंग्रेज़ों के ज़रिए यूरोप पहुँचा, और 19वीं सदी में टमाटर सॉस से जुड़कर अमेरिकी केचप बना। इंडोनेशिया का "kecap" उसी परिवार का सदस्य बनकर आज तक जीवित है।

विकल्प: 2 बड़े चम्मच सोया सॉस, 1 बड़ा चम्मच ब्राउन शुगर और 1 छोटा चम्मच पानी को गरम करके घोलें।

2. तेरासी (Terasi): ख़मीरे झींगे का उमामी बम

तेरासी झींगे या छोटी मछलियों को नमक में रखकर ख़मीर उठाकर सुखाए गए ठोस पेस्ट को कहते हैं। इसकी गंध बहुत तेज़ होती है, पर खाने में डालने पर अनोखा स्वाद और गहराई आती है।

बहुत से सांबल में तेरासी होता है, और नासी गोरेंग में भी यह ज़रूरी है। विकल्प के रूप में सूखे झींगे को बारीक कूटकर इस्तेमाल करना स्वाद के सबसे क़रीब पहुँचता है।

3. सांबल (Sambal): मिर्च की चटनियों का पूरा परिवार

इंडोनेशियाई खाने की बात हो तो सांबल छूट नहीं सकता। यह मिर्च को मुख्य सामग्री बनाकर तैयार मसालों और चटनियों का सामूहिक नाम है, और इसके रूप बहुत ज़्यादा हैं।

इलाक़े के हिसाब से मिर्च की क़िस्म और जोड़ी जाने वाली सामग्री (तेरासी, लाइम, टमाटर आदि) बदलती है, और हर व्यंजन के साथ जोड़ी तय होती है। प्रमुख हैं "सांबल उलेक" (ताज़ी मिर्च और नमक), "सांबल बाजक" (लहसुन, तेरासी और मिर्च) और "सांबल केचप" (मीठा सोया वाला)। सांबल उलेक एशियाई किराना दुकानों पर आसानी से मिलता है।

4. टेम्पे (Tempeh): दुनिया की नज़र वाला ख़मीरा सोयाबीन

टेम्पे जावा द्वीप में उपजा ख़मीरा सोयाबीन का खाना है। उबले सोयाबीन को क्लॉदी Rhizopus oligosporus में लपेटकर रात भर ख़मीर उठाया जाए तो सफ़ेद कवकजाल से ढका ठोस ब्लॉक बनता है।

यह नैटो जैसा ख़मीरा खाना है, पर गंध हल्की होती है और मेवे जैसा स्वाद होता है। हाल के वर्षों में यह वीगन और पौध-आधारित खाने के रूप में दुनिया भर में फैला है। प्रोटीन प्रति 100 g लगभग 19 g है, यानी टोफ़ू से लगभग दोगुना, और फ़ाइबर भी भरपूर।

5. गलांगल (Galangal): अदरक का रिश्तेदार, उष्णकटिबंधीय ख़ुशबू

गलांगल अदरक के कुल का पौधा है, दिखने में अदरक जैसा, पर ठंडक देने वाली ख़ास ख़ुशबू वाला। इंडोनेशियाई खाने की लगभग हर भुनाई और स्ट्यू के आधार में इस्तेमाल होता है।

ताज़ा गलांगल कई जगह मुश्किल से मिलता है, पर सूखा पाउडर या गलांगल वाले पेस्ट (जैसे लाक्सा पेस्ट) से काम चल जाता है।

ख़मीरे सोयाबीन से बना टेम्पे, वीगन खाने के रूप में दुनिया भर का ध्यान खींचती इंडोनेशिया की सामग्री
टेम्पे सोयाबीन को फफूँद से ख़मीर उठाकर बनी पारंपरिक सामग्री है। जावा में इसका कई सौ साल का इतिहास है

राज्य द्वारा मान्य "पाँच राष्ट्रीय इंडोनेशियाई व्यंजन"

इंडोनेशिया का चिकन-चावल और सांबल
पूरे इंडोनेशिया में खाई जाने वाली चिकन और चावल की जोड़ी। इलाक़े के हिसाब से सॉस और पकाने का तरीक़ा बदलता है

2018 में इंडोनेशिया सरकार ने अपने पर्यटन और रचनात्मक अर्थव्यवस्था मंत्रालय के ज़रिए "देश के पाँच प्रतिनिधि व्यंजन" आधिकारिक रूप से घोषित किए। यह खान-पान संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलाने और पर्यटन आकर्षित करने का प्रयास था।

1. रेंडांग (Rendang)

पश्चिमी सुमात्रा के मिनांगकाबाऊ समुदाय का व्यंजन। बीफ़ (या भैंस का मांस) को नारियल के दूध और 20 से ज़्यादा मसालों में 4–5 घंटे उबालकर, फिर पानी उड़ने तक भूना जाता है, जिससे "सूखी करी" बनती है। नाम इंडोनेशियाई में "तेज़ गरमी" के अर्थ से आया है और यह पकाने की प्रक्रिया को भी दर्शाता है।

रेंडांग घर पर कैसे बनाएँ

असली रेंडांग में 5 घंटे लगते हैं, पर बाज़ार का तैयार "रेंडांग पेस्ट" (एशियाई किराना दुकानों पर मिलता है) लें तो लगभग 1 घंटे में तैयार हो जाता है। बीफ़ की पिंडली या बीफ़ पसलियाँ लेने पर बनावट असली के क़रीब रहती है।

2. नासी गोरेंग (Nasi Goreng)

अर्थ है "तला चावल" (nasi = चावल, goreng = तलना)। इंडोनेशिया का राष्ट्रीय तला चावल, जिसमें केचप मानिस और तेरासी से अलग मीठा-नमकीन स्वाद आता है। घर पर बनाएँ तो एक दिन पहले का ठंडा चावल लेना नियम है। नमी उड़ चुका ठंडा चावल खिले-खिले दाने देता है।

बनाने की विधि के लिए नासी गोरेंग की रेसिपी देखें।

3. साते (Sate / Satay)

इंडोनेशिया का प्रतिनिधि सींक पर भुना व्यंजन। पतले कटे बीफ़, चिकन, सूअर (बाली में) या मेमने के मांस को बाँस की सींक में पिरोकर कोयले पर भूना जाता है और मूँगफली की चटनी के साथ खाया जाता है।

साते आज थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर आदि पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया में खाया जाता है। मदुरा द्वीप का साते मदुरा सबसे मशहूर है। इसके साथ मीठी-तीखी मूँगफली की चटनी और मीठा सोया सॉस (केचप मानिस) दोनों परोसे जाते हैं।

4. गादो-गादो (Gado-gado)

"गादो-गादो" जकार्ता इलाक़े का शब्द है जिसका अर्थ है "मिलाओ-मिलाओ"। उबली सब्ज़ियाँ (अंकुरित मूँग, फ्रेंच बीन्स, पत्तागोभी, पालक), टोफ़ू, टेम्पे और उबले अंडे पर मूँगफली की चटनी डालकर बना सलाद।

इसे इंडोनेशिया के वीगन व्यंजन के रूप में भी ध्यान मिलता है, जिसमें फ़ाइबर और प्रोटीन भरपूर हैं। असली तरीक़ा है मूँगफली की चटनी लेमनग्रास और गलांगल भूनकर बनाना, पर पीनट बटर, लाइम, चीनी और सोया सॉस से भी बनाया जा सकता है।

5. सोतो (Soto)

इंडोनेशिया में सबसे ज़्यादा खाए जाने वाले सूप का सामूहिक नाम। इलाक़े के हिसाब से अलग-अलग रूप हैं: सोतो आयम (चिकन का साफ़ सूप), सोतो मदुरा (बीफ़ का गाढ़ा सूप), सोतो बंजार (बोर्नियो का बीफ़ सूप) और दर्जनों दूसरे।

सुमात्रा से पापुआ तक सब खाते हैं, इस अर्थ में सोतो शायद "इंडोनेशिया के राष्ट्रीय भोजन" के सबसे क़रीब है। यह घर के खाने और ठेले के फ़ास्ट फ़ूड दोनों रूपों में पसंद किया जाता है।


इलाक़ाई पहचान: इंडोनेशिया में 17,000 द्वीपों का खाना है

इंडोनेशिया का लुम्पिया (स्प्रिंग रोल)
इंडोनेशिया का लुम्पिया। चीनी खाने से प्रभावित तले स्प्रिंग रोल के देश भर में रूप हैं

इंडोनेशिया दुनिया की चौथी सबसे बड़ी आबादी (लगभग 27 करोड़) वाला बहुजातीय, बहुधार्मिक देश है। खान-पान संस्कृति भी उसी पैमाने को दर्शाती है, और इलाक़ाई फ़र्क़ बहुत बड़े हैं।

जावा द्वीप (जकार्ता, योग्याकार्ता): मीठे-तीखे का सामंजस्य

सबसे बड़ा द्वीप और सबसे घनी आबादी वाला इलाक़ा। जावा के खाने की पहचान है "मीठे-तीखे का संतुलन"। केचप मानिस से आई मीठी मसालेदारी आधार है।

प्रतिनिधि व्यंजन हैं नासी गोरेंग, बाकसो (बीफ़ मीटबॉल सूप) और गुदेग (कटहल का मीठा-नमकीन स्ट्यू)। ख़ासकर गुदेग कच्चे हरे कटहल को ताड़ की चीनी में घंटों पकाकर बनता है और "योग्याकार्ता के खाने का प्रतीक" माना जाता है।

सुमात्रा (पदांग, मेदान): तीखेपन और नारियल दूध की दुनिया

पश्चिमी सुमात्रा के मिनांगकाबाऊ समुदाय का खाना (आम नाम "पदांग खाना") इंडोनेशिया की सबसे तीखी, सबसे मसालेदार खान-पान संस्कृति है। रेंडांग यहीं जन्मा।

पदांग रेस्तराँ की ख़ास शैली "नासी पदांग" है। ग्राहक बैठते हैं तो 15–20 छोटी प्लेटें एक साथ मेज़ पर रख दी जाती हैं और खाए हुए के हिसाब से भुगतान होता है। रेंडांग, पेदास (मिर्च की भुनाई) और गुलाई (नारियल दूध की करी) आदि सजते हैं।

सुमात्रा के खाने के तीखेपन के बारे में

पदांग खाना इंडोनेशिया में भी "सबसे तीखा" कहा जाता है। तीखा पसंद न हो तो "kurang pedas" (कम तीखा) माँगें, या सोतो पदांग जैसा सूप चुनें।

बाली: हिंदू संस्कृति से जन्मा अनोखा खाना

बाली इंडोनेशिया का अकेला मुख्यतः हिंदू द्वीप है। इस्लाम (हलाल) के सूअर निषेध का असर यहाँ नहीं है, और यह सूअर के व्यंजन विकसित होने वाला एकमात्र इलाक़ा है।

बाबी गुलिंग (पूरा भुना सूअर) बाली का प्रतिनिधि व्यंजन है और उत्सवों व ख़ास दिनों के लिए ज़रूरी है। पूरे सूअर को बाली के मसाला पेस्ट "बुम्बु बाली" में मैरिनेट करके कोयले पर धीरे-धीरे घुमाते हुए भूना जाता है। घर पर चिकन से बदलकर बाली की ख़ुशबू आज़माना चाहें तो केले के पत्ते में बुम्बु के साथ भाप में पका आयम बेतुतु शुरुआत का रास्ता है।

मकास्सर (दक्षिण सुलावेसी): बीफ़ संस्कृति का केंद्र

दक्षिण सुलावेसी का शहर मकास्सर इंडोनेशिया का वह इलाक़ा है जहाँ बीफ़ और ऑफ़ल के व्यंजन सबसे ज़्यादा विकसित हैं। कोतो मकास्सर (बीफ़ ऑफ़ल का सूप) गाढ़ा और भरपूर सूप है, जिसे चावल या केतुपात (चावल का केक) के साथ खाया जाता है।

सोप कोनरो बीफ़ की पिंडली की हड्डियों और उपास्थि को धीरे-धीरे उबालकर बना साफ़ सूप है, जिसका स्वाद कोमल है। और पूरब, मालुकु और पापुआ की ओर बढ़ें तो चावल की जगह साबूदाने (सागो) को मुख्य भोजन बनाने वाला पापेदा मिलता है, जो इंडोनेशियाई खाने को केवल "चावल और भुनाई" के रूप में न देखने का अच्छा प्रवेश-द्वार है।


परतों में बनी खान-पान संस्कृति: इतना जटिल और स्वादिष्ट क्यों

इंडोनेशियाई खान-पान संस्कृति के प्रतीक व्यंजन और सामग्री
इंडोनेशियाई खाने की जटिलता व्यापार और प्रवास के परतों में जुड़े इतिहास से आई है

इंडोनेशियाई खाने की समृद्धि सदियों से संस्कृतियों के चौराहे पर रहने के इतिहास से आई है।

स्थानीय लोगों की खाने की समझ (15वीं सदी तक)

सबसे पुरानी खान-पान संस्कृति बोर्नियो, जावा और सुमात्रा के स्थानीय लोगों की है। उनके मुख्य भोजन साबूदाने का ताड़, केला, अरबी, मछली और जंगली सूअर थे, और उन्होंने पत्तों में लपेटकर भाप में पकाने का तरीक़ा बहुत पहले विकसित कर लिया था।

तुम्पेंग (Tumpeng, शंकु आकार का चावल) का रूप भी इसी दौर से जन्मा है, और 2014 में इंडोनेशिया सरकार ने इसे "आधिकारिक राष्ट्रीय व्यंजन" घोषित किया। पर्वत का आकार "समृद्धि और बहुतायत" का प्रतीक है और कृषि के देवताओं के प्रति कृतज्ञता दर्शाता है।

भारतीय और अरब प्रभाव (13वीं से 15वीं सदी)

मसाला व्यापार के ज़रिए भारतीय व्यापारी और अरब मुस्लिम सौदागर इंडोनेशिया पहुँचे और करी तथा हल्दी, धनिया, ज़ीरा जैसे मसाले लाए। साथ ही इस्लाम फैला, और आज भी लगभग 87% आबादी के मुस्लिम होने वाली खान-पान संस्कृति (हलाल) की नींव बनी।

गुलाई (इंडोनेशियाई नारियल दूध करी) भारतीय करी का स्थानीय रूप है।

चीनी प्रभाव (15वीं से 20वीं सदी)

मजापहित साम्राज्य के समय से चले आ रहे चीन के साथ आदान-प्रदान ने भुनाई की तकनीक, नूडल, टोफ़ू और सोया प्रसंस्करण की तकनीक पहुँचाई। एक मत यह भी है कि टेम्पे की सोया ख़मीर तकनीक भी चीन से आकर अलग से विकसित हुई।

मी गोरेंग (तले नूडल), बाकसो (बीफ़ मीटबॉल) और लुम्पिया (स्प्रिंग रोल) सब चीनी मूल की खान-पान संस्कृति के बदले रूप हैं। इंडोनेशिया के चीनी मूल के लोग आबादी का लगभग 3% हैं, पर खान-पान पर उनका असर अपार है।

डच औपनिवेशिक काल (17वीं से 20वीं सदी की शुरुआत)

डचों ने 1602 से लगभग 300 साल इंडोनेशिया पर औपनिवेशिक शासन किया। राइस्टाफ़ेल (Rijsttafel, "चावल की मेज़") डचों का गढ़ा रूप है, जो इंडोनेशिया के कई छोटी प्लेटों वाले खाने के ढंग का यूरोपीय लोगों के लिए रूपांतर था।

16वीं सदी में पुर्तगालियों के लाई मिर्च (मूल रूप से दक्षिण अमेरिकी) और सांबल संस्कृति के विस्फोटक प्रसार की जड़ भी इसी दौर की विरासत है। आज भी नीदरलैंड में इंडोनेशियाई खाना "लगभग राष्ट्रीय भोजन" के रूप में जमा हुआ है।


इंडोनेशियाई व्यंजन जो आप कहीं भी बना सकते हैं: आज रात के खाने के विकल्प

इंडोनेशिया का गादो-गादो। सब्ज़ियों का मूँगफली चटनी वाला सलाद
गादो-गादो (मूँगफली चटनी वाला गरम सब्ज़ी सलाद) आम सामग्री से भी आसानी से दोहराया जा सकता है

इंडोनेशियाई खाना दिखने में जितना जटिल लगता है, उसकी तुलना में घर पर बनाने में असल में आसान बहुत से व्यंजन हैं।

व्यंजन कठिनाई ज़रूरी ख़ास सामग्री विकल्प
नासी गोरेंग शुरुआती केचप मानिस, तेरासी सोया सॉस + चीनी / सूखे झींगे
साते (चिकन सींक) शुरुआती केचप मानिस सोया सॉस + चीनी + पीनट बटर
गादो-गादो शुरुआती तेरासी, कैंडलनट सूखे झींगे / मैकाडामिया
मीठा-तीखा भुना टेम्पे शुरुआती टेम्पे कई एशियाई किराना और प्राकृतिक खाद्य दुकानों पर मिलता है
मी गोरेंग शुरुआती से मध्यम केचप मानिस, झींगा पेस्ट ऊपर के विकल्प चलते हैं
सोतो आयम मध्यम गलांगल, लेमनग्रास सूखा पाउडर चलता है
रेंडांग मध्यम से कठिन रेंडांग पेस्ट एशियाई किराना दुकानों पर पेस्ट मिलता है
घर का बना केचप मानिस

3 बड़े चम्मच सोया सॉस, 2 बड़े चम्मच ब्राउन शुगर और 1 बड़ा चम्मच पानी अच्छी तरह मिलाकर धीमी आँच पर 2–3 मिनट गरम करें; चीनी घुलने पर असली केचप मानिस जैसे स्वाद वाला मसाला बन जाता है। बाज़ार के उत्पाद से कम मीठा बनता है, पर खाना पकाने के लिए काफ़ी है।


दक्षिण-पूर्व एशियाई खाने में इंडोनेशियाई खाने की जगह

इंडोनेशिया का साते (सींक पर भुना मांस)। मूँगफली की चटनी के साथ
साते (सींक का भुना) इंडोनेशिया का राष्ट्रीय स्ट्रीट फ़ूड है। मूँगफली की चटनी निर्णायक है

दक्षिण-पूर्व एशियाई खाने की श्रेणी में इंडोनेशियाई खाने की कुछ अनोखी ख़ासियतें हैं।

हमारी दक्षिण-पूर्व एशियाई रेसिपी

हम दक्षिण-पूर्व एशिया के हर देश के व्यंजन पेश करते हैं, जैसे थाईलैंड का गापाओ, पैड थाई और वियतनाम का बान मी, जो आम सामग्री से बनाए जा सकते हैं।

थाई खाने से फ़र्क़: थाई खाने में जड़ी-बूटियों (तुलसी, धनिया) की ताज़गी और फ़िश सॉस (नाम प्ला) की खटास आगे रहती है, जबकि इंडोनेशियाई खाने में मसालों की गहराई और नारियल दूध की मिठास केंद्र में है। मीठे-तीखे की बनावट अलग है। थाईलैंड का गापाओ चावल दक्षिण-पूर्व एशिया का लोकप्रिय प्रतिनिधि व्यंजन है, और इंडोनेशियाई खाने की तरह रोज़ के "चावल के साथ" की तरह पसंद किया जाता है।

वियतनामी खाने से फ़र्क़: वियतनामी खाने की पहचान ख़मीर, ताज़ी जड़ी-बूटियाँ और बनावट हैं, जबकि इंडोनेशियाई खाने में अक्सर पकाकर (भुनाई, स्ट्यू) जटिल स्वाद निकाला जाता है। बान मी जैसे "ताज़गी पर टिके व्यंजन" इंडोनेशियाई खाने में लगभग नहीं हैं।

मलेशियाई खाने से रिश्ता: इंडोनेशिया और मलेशिया जातीय और सांस्कृतिक रूप से बहुत क़रीब हैं, और रेंडांग, साते और नासी गोरेंग दोनों देशों की "साझा सांस्कृतिक विरासत" हैं। अक्सर "असली किसका है" का विवाद उठता है। जैसे पैड थाई थाईलैंड का राष्ट्रीय भोजन है, वैसे ही नासी गोरेंग दोनों देशों में राष्ट्रीय भोजन के रूप में जमा हुआ है।


इंडोनेशियाई खाना आज़माने के लिए सामग्री जुटाने की गाइड

इंडोनेशिया का सांबल (मिर्च की चटनी) और मसाले
सांबल इंडोनेशियाई खाने का हृदय है। शैलट, मिर्च और झींगा पेस्ट मूल सामग्री हैं
पहले इंडोनेशियाई व्यंजन के लिए "नासी गोरेंग" सबसे अच्छा

यह आम किराना दुकान की सामग्री से ही बन जाता है, ग़लती कम होती है और दिखने में भी अच्छा लगता है। केचप मानिस की जगह "सोया सॉस + चीनी" इस्तेमाल करें तो किसी ख़ास सामग्री के बिना पूरा हो जाता है। पूरी रेसिपी के लिए नासी गोरेंग कैसे बनाएँ देखें।

सामग्री कहाँ मिलेगी टिप्पणी
केचप मानिस एशियाई किराना दुकानें, ऑनलाइन ABC ब्रांड सबसे आम है
तेरासी (झींगा पेस्ट) एशियाई किराना दुकानें, ऑनलाइन थोड़ी मात्रा में भी तेज़ स्वाद
सांबल उलेक एशियाई किराना दुकानें आसानी से मिलता है
टेम्पे (फ़्रोज़न) एशियाई किराना दुकानें, प्राकृतिक खाद्य दुकानें पिघलाकर सेंकना ही काफ़ी स्वादिष्ट है
गलांगल पाउडर एशियाई किराना दुकानें, ऑनलाइन थोड़ी मात्रा से भी स्वाद आता है
रेंडांग पेस्ट एशियाई किराना दुकानें जाने-माने ब्रांड मिलते हैं
लेमनग्रास (सूखा) एशियाई किराना दुकानें, सुपरमार्केट ताज़ा भी एशियाई किराना दुकानों पर मिलता है

साथ में बनाने लायक़ और व्यंजन

इंडोनेशियाई और दक्षिण-पूर्व एशियाई व्यंजनों की सजी मेज़
नासी गोरेंग और रेंडांग से आगे पड़ोसी देशों के व्यंजनों तक जाने पर दक्षिण-पूर्व एशिया की सामग्री का उपयोग साफ़ दिखता है
  • खाओ सोई: उसी इलाक़े की सामग्री और ख़ुशबू दोबारा काम आती हैं।
  • आयम बेतुतु: बाली के मसाला पेस्ट और लपेटकर पकाने की विधि को गहराई से जानें।
  • बुन बो ह्यू (जापानी में): उसी इलाक़े की सामग्री और ख़ुशबू दोबारा काम आती हैं।
  • मी गोरेंग: उसी देश की थाली को आगे बढ़ाएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

इंडोनेशिया का गुदेग। नारियल दूध में पका कटहल
योग्याकार्ता की ख़ासियत गुदेग। कच्चे कटहल को नारियल दूध में धीरे-धीरे पकाया जाता है

क्या इंडोनेशियाई खाना तीखा होता है?

इलाक़े के हिसाब से बहुत अलग है। पश्चिमी सुमात्रा (पदांग) का खाना बहुत तीखा है, जावा का खाना मीठे-तीखे के संतुलन से अपेक्षाकृत हल्का, और बाली का खाना मसालेदार पर सांबल अक्सर अलग से परोसा जाता है। "kurang pedas" यानी "कम तीखा" कहें तो रसोई उसके अनुसार बना देती है।

क्या टेम्पे सेहत वाले खाने के रूप में ध्यान पा रहा है?

ध्यान बढ़ रहा है। इसमें सोया प्रोटीन (प्रति 100 g लगभग 19 g), फ़ाइबर और विटामिन B12 भरपूर है, और यह वीगन तथा पौध-आधारित खाने के रूप में जम रहा है।

नासी गोरेंग और चीनी शैली के तले चावल में क्या फ़र्क़ है?

सबसे बड़ा फ़र्क़ मसाले का है। नासी गोरेंग में केचप मानिस (मीठा सोया सॉस) और तेरासी (झींगा पेस्ट) पड़ते हैं, जिससे मीठा-नमकीन स्वाद और एक अलग "ख़मीरापन" आता है। यह साधारण तले चावल के सोया सॉस के स्वाद से मूल रूप से अलग है। ऊपर तला अंडा और क्रुपुक (झींगा कुरकुरे) रखना भी नासी गोरेंग की ख़ासियत है।

क्या रेंडांग और करी एक ही चीज़ हैं?

अलग हैं। रेंडांग "सुखाया गया मांस व्यंजन" है और करी की तरह रसा नहीं बचता। तरीक़ा मिलता-जुलता है (नारियल दूध और मसालों में उबालना), पर अंत में पानी पूरी तरह उड़ाकर मांस और मसाले एक हो जाते हैं।

क्या इंडोनेशियाई खाने में एलर्जी की सावधानियाँ हैं?

मूँगफली की एलर्जी: मूँगफली की चटनी (साते, गादो-गादो) में इस्तेमाल होती है। बड़ी मात्रा में पड़ती है, इसलिए सावधान रहें। झींगे की एलर्जी: तेरासी (झींगा पेस्ट) लगभग हर व्यंजन में छिपे मसाले के रूप में पड़ता है। झींगे से एलर्जी हो तो ज़रूर पूछें। ग्लूटेन: मी गोरेंग (गेहूँ के नूडल) में ग्लूटेन है।


संदर्भ

इंडोनेशिया का रेंडांग। नारियल दूध में पका बीफ़
रेंडांग, नारियल दूध में पानी उड़ने तक पका बीफ़
इंडोनेशिया का मसाला बाज़ार
इंडोनेशिया दुनिया के प्रमुख मसाला उत्पादक देशों में है। मसालों के द्वीप कहलाने के इतिहास ने खान-पान संस्कृति को सींचा
  1. Wikipedia contributors. "Indonesian cuisine." Wikipedia, 2024. https://en.wikipedia.org/wiki/Indonesian_cuisine
  2. Mark Wiens. "Best Indonesian Food: 50 Dishes to Eat in Indonesia." migrationology.com, 2024. https://migrationology.com/indonesian-food/
  3. CNN Travel Staff. "World's 50 most delicious foods." CNN, 2011 (updated 2024). https://edition.cnn.com/travel/article/world-best-food-dishes/index.html