इमली की खटास जो भाप में उठती है, ऐसा मछली स्टू
रसोई में सूखी मिर्च को गरम पानी में भिगोना, प्याज़ और लेमनग्रास काटना, इमली को पानी में घोलना। यहाँ तक पहुँचते ही हवा रोज़ की मछली की रसेदार सब्ज़ी से बिल्कुल अलग दिशा में बदल जाती है। सोया सॉस की मीठी-नमकीन नहीं, बल्कि लाल तेल की ख़ुशबू, नीबू जैसी खटास और मछली से निकला शोरबा। बर्तन के किनारे पर छोटे बुलबुले उठने लगें तो सफ़ेद चावल परोसने वाला हाथ अपने-आप तेज़ हो जाता है।
असम पेदास, स्थानीय वर्तनी में Asam pedas, मलय में "खट्टा, तीखा" के अर्थ वाला नाम है, और नाम के अनुसार इमली की खटास और मिर्च के तीखेपन में मछली पकाने वाला व्यंजन है। यह मलय प्रायद्वीप, सुमात्रा, बोर्नियो और सिंगापुर की मलय व पेरानाकान मेज़ों में खाया जाता है, और इलाक़े के अनुसार asam padeh, gerang asam जैसे नाम और मसाले बदलते हैं। इसे अकेले सिंगापुर में जन्मा मानने की बजाय बंदरगाहों और जलडमरूमध्य के बीच पनपा खट्टा-तीखा मछली स्टू मानना ख़रीदारी और स्वाद बनाने, दोनों को समझने में आसान करता है।
इस लेख में आम सुपरमार्केट में मिलने वाली सफ़ेद मछली को केंद्र में रखकर इमली का पेस्ट, लेमनग्रास, हल्दी और सूखी मिर्च से घरेलू रूप बनाया गया है। स्थानीय तौर पर इस्तेमाल होने वाली स्टिंगरे, लाल मछली, टॉर्च जिंजर और लाक्सा के पत्ते जुटाना कठिन है, इसलिए बनाए रखने और बदली जा सकने वाली सामग्री को अलग किया गया है। खटास, लाल मसाला लेई, और मछली को बिखरने से बचाने वाली पकाई: ये तीन निभाएँ तो घर की रसोई में भी काफ़ी क़रीब पहुँचा जा सकता है।
सिंगापुर का कोई और सहज भोजन चाहिए तो रोटी जॉन (जापानी में), और मुर्ग़े के शोरबे व चावल की ख़ुशबू के लिए हैनान चिकन राइस (जापानी में) देखें। मछली को सुगंधित सामग्री के साथ खाने का दूसरा रूप, पत्तों में लपेटकर भुनी ओटक-ओटक, भी आगे पढ़ने की क़रीबी कड़ी है। खट्टी मछली के व्यंजन के रूप में तुलना करनी हो तो फ़िलीपीन्स की सिनिगैंग और थाईलैंड की टॉम यम गूंग (जापानी में) के साथ रखकर देखें, तब इमली के इस्तेमाल का फ़र्क़ दिखता है।
मलय की आम वर्तनी Asam pedas है। अंग्रेज़ी में इसे Assam pedas भी लिखा जाता है, और दूसरे रूप भी मिलते हैं। इस लेख में शीर्षक के लिए "असम पेदास" इस्तेमाल हुआ है और मूल पाठ में Assam pedas भी साथ दिया है।
असम पेदास क्या है: सिंगापुर में खाया जाने वाला खट्टा-तीखा मछली स्टू
Asam pedas की जड़ खटास और तीखेपन का संतुलन है। यह नारियल के दूध से गोल की गई करी नहीं है: लाल मसाला लेई भूनी जाती है, इमली के पानी से ढीली की जाती है, और मछली थोड़ी देर पकाई जाती है। लेई को इतना भूना जाता है कि सतह पर तेल की पतली परत तैरे, जबकि शोरबा ख़ुद भारी नहीं बनाया जाता। चावल पर डालने से खटास मुँह को हल्का लौटाती है, और मछली की चर्बी व मिर्च की ख़ुशबू बाद तक रहती है।
सिंगापुर की खान-पान संस्कृति में सांबल और लेम्पा जैसी मिर्च की लेई मलय, पेरानाकान और यूरेशियन व्यंजनों में व्यापक रूप से इस्तेमाल होती हैं। Asam pedas उसी का विस्तार है, और दुकान व घर के हिसाब से मछली, सब्ज़ियाँ और खट्टी सामग्री बदलती हैं। National Heritage Board के Kampong Gelam वाले लेख में भी बताया गया है कि मिनांगकाबाऊ शैली के भोजनालयों ने सिंगापुर के स्वाद के अनुसार Asam pedas में मिठास जोड़ी, जिससे समझ आता है कि स्थानीय तौर पर भी यह "एक सही उत्तर" नहीं, बल्कि जगह और खाने वालों के हिसाब से ढलता व्यंजन है।
| देखने की बात | स्थानीय तौर पर आम रूप | घर की रसोई में कैसे सोचें |
|---|---|---|
| खटास | इमली, असम केपिंग, लाइम | पहली बार इमली का पेस्ट इस्तेमाल करें |
| तीखापन | सूखी मिर्च, ताज़ी मिर्च, सांबल | सूखी मिर्च भिगोएँ और संख्या से तीखापन ठीक करें |
| मछली | स्टिंगरे, मैकेरल जैसी, सी ब्रीम, नदी की मछली, मछली का सिर | स्पैनिश मैकेरल, स्वोर्डफ़िश, सी बास या कॉड के मोटे टुकड़े |
| सुगंधित सामग्री | लेमनग्रास, हल्दी, अदरक, झींगे का ख़मीरी मसाला | लेमनग्रास और हल्दी को प्राथमिकता दें। झींगे वाले उत्पाद में एलर्जी का ध्यान रखें |
| सब्ज़ियाँ | भिंडी, बैंगन, टमाटर, लाक्सा के पत्ते | भिंडी, बैंगन और टमाटर से बनावट और खटास बनाएँ |
पेरानाकान रेसिपियों में लाक्सा के पत्ते और टॉर्च जिंजर ख़ुशबू की धुरी हो सकते हैं। पर वे बाहर हर बार जुटाने में कठिन हैं। इस लेख में ख़ुशबू के स्तंभ लेमनग्रास, अदरक और हल्दी पर टिकाए गए हैं, और अंत में थोड़ा शिसो या हरा धनिया जोड़ने का व्यावहारिक हल अपनाया गया है। यह पूरी नक़ल नहीं; ज़रूरी यह है कि पहले तय करें कौन-सी ख़ुशबू व्यंजन की रूपरेखा बनाती है।
सामग्री: मछली, इमली और मसाला लेई पहले तय करें

4 लोगों के लिए। मोटे टुकड़े की मछली लें। कॉड जैसी आसानी से बिखरने वाली मछली से भी बन जाता है, पर पहली बार स्पैनिश मैकेरल, स्वोर्डफ़िश, सी बास या सी ब्रीम जैसी मछली, जिसका मांस गरम करने पर आसानी से न खुले, सँभालने में आसान है। जमी मछली इस्तेमाल करें तो फ़्रिज में पिघलाएँ, सतह का पानी पोंछें और फिर नमक छिड़कें।
इसमें मछली, झींगे से बना मसाला और फ़िश सॉस इस्तेमाल होते हैं। झींगे की लेई डालें तो शेलफ़िश एलर्जी का ध्यान रखें। जिस मेज़ पर तीखा न खाने वाले हों, वहाँ सूखी मिर्च 6 कर दें और बीज ज़्यादा निकाल दें।
ख़रीदारी में उलझन वाली सामग्री: खटास और ख़ुशबू तय करें
असम पेदास ऐसा व्यंजन नहीं जिसमें मछली या भिंडी ऑनलाइन ख़रीदनी पड़े। देखने लायक़ हैं खटास, सुगंधित सामग्री और रंग की वह जड़ जो पास के सुपरमार्केट में कभी-कभी नहीं मिलती। इन्हें अस्पष्ट छोड़ें तो यह आसानी से बस लाल मछली का सूप रह जाता है, इसलिए पहले ख़रीदारी की धुरी तय कर लें।
इमली इस व्यंजन की नायक है। नीबू या सिरके से भी खटास आती है, पर वह इमली की फल जैसी गोल खटास से अलग है। पहली बार पेस्ट इस्तेमाल करें तो बीज ढीले करने और छानने की मेहनत घटती है, और खटास ठीक करना आसान होता है।
झींगे की लेई थोड़ी मात्रा में लाल शोरबे में ख़मीरी उमामी जोड़ती है। बिना डाले भी बनता है, पर मलय ढंग की खट्टी-तीखी मछली के क़रीब जाना हो तो सिर्फ़ मिसो की बजाय 1/2 tsp मसाला लेई में मिलाने से रूपरेखा उभरती है। जिस मेज़ पर शेलफ़िश से एलर्जी हो वहाँ ज़बरदस्ती न डालें; मिसो और फ़िश सॉस से हल्का सहारा दें।
हल्दी सिर्फ़ रंग नहीं, मछली की गंध को गोल करने वाली ख़ुशबू का आधार भी है। ताज़ी हल्दी न मिले तो थोड़ा-सा पाउडर काफ़ी है। ज़्यादा डालने पर वह आटे जैसा और कड़वा हो जाता है, इसलिए 1 tsp ऊपरी सीमा रखें।
बनाने की विधि: लेई भूनें और मछली थोड़ी देर पकाएँ
इस व्यंजन में सबसे आसानी से बिगड़ने वाली चीज़ें हैं मसाला लेई का कम भुनना और मछली का ज़्यादा पकना। लेई को जलाए बिना तेल रिसने तक भूनें, और मछली आख़िर में डालकर धीमी आँच पर शांति से पकाएँ। मछली डालने के बाद घुमा-घुमाकर चलाएँगे तो मांस बिखरता है और शोरबा धुँधला हो जाता है।
सूखी मिर्च घटाकर 6 करें और बीज लगभग पूरे निकाल दें। बड़ों के लिए मेज़ पर सांबल का विकल्प 1-1 tsp जोड़ें, तो पूरे बर्तन को बहुत तीखा किए बिना ठीक किया जा सकता है।
घर की रसोई में असली स्वाद के क़रीब पहुँचने का शाखा-तालिका

असम पेदास ऐसा व्यंजन नहीं जिसे सारी स्थानीय सामग्री जुटाए बिना बनाया न जा सके। पर क्या बदला जाए, इससे स्वाद की दिशा बहुत बदल जाती है। पहली बार इमली, लेमनग्रास और हल्दी बनाए रखें, और मछली व जड़ी-बूटी को बिना ज़ोर लगाए मिलने वाली चीज़ों की ओर ले जाएँ।
| उलझन वाली सामग्री | असली के क़रीब | घर पर व्यावहारिक हल | फ़ैसला |
|---|---|---|---|
| मछली | स्टिंगरे, लाल मछली, मछली का सिर | स्पैनिश मैकेरल, स्वोर्डफ़िश, सी बास, सी ब्रीम | न बिखरने वाले मोटे टुकड़ों को प्राथमिकता |
| खटास | इमली का गूदा, असम केपिंग | इमली का पेस्ट | सिर्फ़ नीबू का रस न लें |
| जड़ी-बूटी | लाक्सा के पत्ते, टॉर्च जिंजर | शिसो, हरा धनिया, थोड़ा पुदीना | जड़ी-बूटी अंत में हल्के से जोड़ें |
| ख़मीरी उमामी | बेलाचान, झींगे की लेई | 1/2 tsp झींगे की लेई, या मिसो और फ़िश सॉस | एलर्जी हो तो ज़बरदस्ती न डालें |
| तीखापन | सूखी और ताज़ी मिर्च | सूखी मिर्च भिगोकर, संख्या से घटाएँ-बढ़ाएँ | सिर्फ़ मिर्च पाउडर से ख़ुशबू चपटी रह जाती है |
सबसे बड़ी चिंता मछली की होती है। स्टिंगरे स्थानीय एहसास देती है, पर घर में उसका मिलना स्थिर नहीं। स्पैनिश मैकेरल में चर्बी और नरम मांस का संतुलन है और वह खट्टे शोरबे के साथ जमती है। स्वोर्डफ़िश आसानी से नहीं बिखरती और उसमें मछली की गंध कम है, इसलिए पहली बार के लिए ठीक है। कॉड इस्तेमाल करें तो पकाने का समय छोटा रखें और बर्तन में उसे छूने से बचना प्राथमिकता है।
खटास को सिरके से बदलना बेहतर नहीं है। सिरका तीखा होता है और मछली की ख़ुशबू को दूसरी दिशा में ले जाता है। इमली न हो तो आपात स्थिति में 2 tsp उमे (अचार वाले प्लम) का गूदा और 2 tsp नीबू का रस पानी में घोलने का तरीक़ा भी है, पर यह घर की रसोई का बचाव उपाय है। उसे असम पेदास कहना हो तो जहाँ तक हो सके इमली जुटा लें।
मेन्यू चावल केंद्रित है। बग़ल में भारी तला हुआ रखने की बजाय खीरा, उबला अंडा और साग की हल्की भुजिया जमती हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया की मेज़ तक फैलाना हो तो मलेशिया के नासी लेमाक की सांबल, इंडोनेशिया की अरसिक की खटास और थाईलैंड के टॉम यम गूंग (जापानी में) की जड़ी-बूटी वाली महक से तुलना करें, तो असम पेदास की रूपरेखा साफ़ होती है।
ग़लतियों की वजहें: बहुत खट्टा, मछली बिखरी, ख़ुशबू हल्की

| हालत | वजह | कैसे सुधारें |
|---|---|---|
| बहुत खट्टा | इमली के पेस्ट की गाढ़ाहट तेज़ है | 2 tbsp पानी, 1/2 tsp चीनी और थोड़े नमक से गोल करें |
| मछली बिखर जाती है | तेज़ आँच पर उबाला, चम्मच से बहुत छुआ | मछली डालने के बाद धीमी आँच। बर्तन हिलाकर शोरबा घुमाएँ |
| ख़ुशबू हल्की है | मसाला लेई कम भुनी | तेल रिसने तक मध्यम-धीमी आँच पर 6 से 7 मिनट भूनें |
| आटे जैसा | हल्दी ज़्यादा पड़ी | 1 tsp तक। कम लगे तो रंग से नहीं, सुगंधित सामग्री से पूरा करें |
| मछली की गंध | मछली की नमी नहीं पोंछी, या पकाई कम | नमक छिड़ककर 10 मिनट रखें, नमी पोंछें और बीच के सफ़ेद होने तक पकाएँ |
खटास का समायोजन आख़िर में एक झटके में न करना आसान रहता है। इमली शुरू से पूरी डाल दें तो गाढ़े उत्पाद में वह बहुत तेज़ हो जाती है। पहली बार इस्तेमाल हो रहे पेस्ट से 20 g से शुरू करें और चरण 3 में चखकर जोड़ें, यह सुरक्षित है। खटास समय के साथ थोड़ी गोल होती है, इसलिए पकाते समय "ज़रा-सी तेज़" लगे तो चावल के साथ खाने पर ठीक बैठती है।
मछली का बिखरना स्वाद से पहले रूप में दिखता है। मांस के किनारे फटने लगें और शोरबा बारीक मछली के टुकड़ों से धुँधला हो जाए तो यह आँच तेज़ होने का संकेत है। आँच धीमी करें, और सब्ज़ियाँ डालते समय उन्हें मछली पर गिराने की बजाय बर्तन की ख़ाली जगह में फिसलाते हुए डालें।
ख़ुशबू हल्की हो तो बाद में मिर्च पाउडर जोड़ने से गहराई नहीं आती। लाल मसाला लेई भूनने के चरण में प्याज़ की नमी उड़ाना और मिर्च व हल्दी का रंग तेल में उतारना अहम है। सिर्फ़ इस चरण को छोटा न करें।
खाने का तरीक़ा, भंडारण और मेन्यू

खाने का तरीक़ा सरल है। गहरी थाली में चावल परोसें और ऊपर से मछली व लाल शोरबा डालें। भिंडी की लिसलिसाहट, बैंगन की नरमी और टमाटर की खटास के कारण साथ की सब्ज़ी हल्की रखना काफ़ी है। खीरे के पतले क़तले, उबला अंडा, लहसुन में भुना साग और बिना चीनी की चाय अच्छी जमती हैं।
रखना हो तो मछली को बिना तोड़े चौड़े डिब्बे में डालें। हल्का ठंडा होने के बाद फ़्रिज में रखें, और भंडारण का अंदाज़ा अगले दिन तक का है। इमली की खटास होने पर भी यह मछली का व्यंजन है, इसलिए देर तक न रखें। दोबारा गरम करने के लिए बर्तन में डालें और धीमी आँच पर 5 से 6 मिनट, जब तक शोरबा बुलबुले न छोड़े। माइक्रोवेव में 600 W पर 1 मिनट 30 सेकंड, और मछली का बीच ठंडा हो तो 30-30 सेकंड बढ़ाएँ।
पहले से बनाकर रखने में सबसे बचने लायक़ बात है मछली और चावल को साथ रखना। चावल खट्टा शोरबा सोख लेता है और अगले दिन भारी हो जाता है। शोरबा शोरबा रहे और चावल चावल, इस तरह अलग रखें तो दोबारा गरम करने पर बनावट लौट आती है।
बचा शोरबा अगले दिन दोपहर में सोमेन या राइस नूडल्स पर डालकर भी इस्तेमाल हो सकता है। उस हालत में मछली निकाल लें, सिर्फ़ शोरबे को हल्का उबालकर नूडल्स पर डालें। हरा धनिया, शिसो और खीरा जोड़ने पर खटास आगे नहीं आती और खाना आसान होता है।
FAQ
क्या इमली के बिना बन सकता है?
बन सकता है, पर व्यंजन की जड़ काफ़ी बदल जाती है। आपात स्थिति में 2 tsp उमे का गूदा, 2 tsp नीबू का रस और 3 tbsp पानी मिलाकर खटास बनाई जा सकती है। पर इमली की फल जैसी गोलाई नहीं आएगी। पहली बार से असम पेदास के रूप में बनाना हो तो इमली का पेस्ट जुटाने से ग़लती कम होती है।
कौन-सी मछली सबसे ठीक रहती है?
आम सुपरमार्केट में स्पैनिश मैकेरल, स्वोर्डफ़िश, सी बास और सी ब्रीम सँभालने में आसान हैं। कॉड आसानी से मिल जाती है पर बिखरती भी आसानी से है, इसलिए मोटे टुकड़े चुनें और पकाते समय छुएँ नहीं। सैल्मन से भी बन जाता है, पर उसकी चर्बी और गंध तेज़ होती है और वह स्थानीय सफ़ेद मछली की छाप से कुछ दूर हो जाती है।
क्या झींगे की लेई के बिना स्वाद फीका पड़ता है?
थोड़ा हल्का होता है, पर बन जाता है। झींगे से एलर्जी हो तो ज़बरदस्ती न डालें, 1/2 tsp मिसो और 1 tsp फ़िश सॉस से सहारा दें। फ़िश सॉस से भी बचना हो तो नमक 1/4 tsp बढ़ाएँ और मसाला लेई को अच्छी तरह भूनकर गहराई लाएँ।
तीखापन कैसे घटाएँ?
सूखी मिर्च घटाकर 6 करें और बीज ज़्यादा निकाल दें। ताज़ी मिर्च न डालें। तीखा पसंद करने वाले ही मेज़ पर सांबल या मिर्च के फ़्लेक डालें। पूरे बर्तन को तीखा बनाकर फिर हल्का करने से खटास और नमक का संतुलन भी आसानी से बिगड़ जाता है।
क्या नारियल का दूध डाल सकते हैं?
डालने पर यह किसी दूसरी मछली की करी के क़रीब पहुँच जाता है। असम पेदास की पहचान नारियल से गोल न की गई खटास और तीखेपन में है। तीखापन नरम करना हो तो नारियल का दूध नहीं, थोड़ी चीनी डालें और चावल व खीरे से मुँह लौटाएँ, इससे व्यंजन की रूपरेखा बची रहती है।
किसके साथ परोसने से मेज़ पूरी होती है?
चावल, खीरा और साग की भुजिया अकेले भी काफ़ी हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया का मेन्यू बनाना हो तो हैनान चिकन राइस (जापानी में) की अदरक की चटनी, लाक्सा के गाढ़े सूप और सिनिगैंग की खटास से तुलना करें, तो इमली वाले व्यंजनों का दायरा दिखता है।
संदर्भ
- Wikipedia, Asam pedas
- Nyonya Cooking, Asam Pedas Ikan Pari
- SBS Food, Native ingredient asam pedas
- National Heritage Board, Rumah Makan Minang
- National Heritage Board, Making and Use of Sambal











