काबुली पलाव: बासमती चावल पर मेमने का मांस, गाजर, किशमिश और मेवे की परतें, अफ़ग़ानिस्तान का उत्सवी पुलाव
तैयारी35 मिनट
पकाने का समय1 घंटे 40 मिनट
कितने लोगों के लिए4 लोगों के लिए
पाक शैलीअफ़ग़ान

काबुली पलाव: मेमने, गाजर और किशमिश वाला अफ़ग़ानिस्तान का उत्सवी पुलाव

अफ़ग़ानिस्तान के उत्सवी चावल काबुली पलाव की रेसिपी: मेमने, बासमती, गाजर, किशमिश और मेवों की परतें। बीफ़ या चिकन से बदलाव, चावल चिपचिपा क्यों होता है, कपड़ा लगाकर भाप में पकाने की आँच, और बचे पलाव को रखने व अगले दिन गरम करने के तरीके।

कुल समय: 2 घंटे 15 मिनटकठिनाई: मध्यम

Cooking flow

बनाने की विधि

STEP 11 / 8

चावल धोकर भिगोना

बासमती को हल्के हाथ से धोकर छलनी में निथारना
रगड़ें नहीं, बस गँदलापन निकालें, 30 मिनट भिगोएँ और छलनी में निथार लें

2 जापानी चावल-कप (लगभग 300 g) बासमती को हल्के हाथ से धोएँ और पानी बदलते हुए सफ़ेद गँदलापन थोड़ा हटा दें। भरपूर पानी में 30 मिनट भिगोएँ, फिर छलनी में निथार लें। ज़ोर से रगड़ने पर दाने टूटते हैं और भाप में पकाने पर चावल चिपचिपा हो जाता है।

STEP 22 / 8

मेमने और प्याज़ को भूनना

मोटे तले की देग में मेमने को प्याज़, जीरा और इलायची के साथ भूनना
उबालने से पहले सतह भून लेने से शोरबे में भुनी हुई सौंधी महक आती है। प्याज़ को गहरा भूरा न करें

मोटे तले की देग में 2 tbsp तेल डालकर मध्यम आँच पर प्याज़ को 8 मिनट भूनें। हल्का भूरा हो जाए तो 600 g मेमना, लहसुन, जीरा, इलायची, दालचीनी और काली मिर्च डालें और मांस की सतह पर भूरा रंग आने तक 6–8 मिनट भूनें।

STEP 33 / 8

मांस को नरम होने तक उबालना

प्याज़ और मसालों के शोरबे में मेमने को नरम होने तक उबालती देग
धीमी आँच पर हल्के खदबदाते हुए मांस को चॉपस्टिक से बिखरने से ज़रा पहले तक पकाएँ। शोरबा चावल की भाप के लिए रखें

700 ml पानी, 1 1/2 tsp नमक और 1 tsp चीनी डालें, उबाल आने पर आँच धीमी कर दें। ढक्कन थोड़ा सरकाकर रखें और मेमना हो तो 60–75 मिनट, बीफ़ की पिंडली हो तो 90 मिनट, चिकन की जांघ हो तो 25–30 मिनट पकाएँ। जब मांस चॉपस्टिक से बिखरने से ज़रा पहले की नरमी पर आ जाए, उसे निकाल लें और लगभग 450 ml शोरबा रख लें।

STEP 44 / 8

गाजर और किशमिश भूनना

चमकती भुनी गाजर, किशमिश, बादाम और पिस्ते
गाजर को मीठी भूनें, पर गलने न दें। चावल के ऊपर उसका कुरकुरापन और रंग बना रहना चाहिए

अलग कड़ाही में 1 1/2 tbsp तेल या मक्खन डालकर गाजर को मध्यम आँच पर 4 मिनट भूनें। 1 tbsp चीनी और किशमिश डालकर 2 मिनट और भूनें। किशमिश फूल जाए और गाजर चमकने लगे, तो आँच बंद करें और बादाम व पिस्ता मिलाएँ।

STEP 55 / 8

चावल को आधा उबालना

आधे उबले बासमती को छलनी में निथारना
चावल पूरा न पकाएँ, बीच में थोड़ी कच्ची परत रहते रुक जाएँ। आगे मांस का शोरबा सोखकर भाप में पकेगा

बड़ी देग में भरपूर पानी तेज़ आँच पर ख़ूब उबालें और 1 tsp नमक डालें। भीगे चावल डालकर सिर्फ़ 4–5 मिनट उबालें। दाने लंबे हो जाएँ और बीच में पतली-सी कच्ची परत बची रहे, तब छलनी में निथार लें। यहाँ पूरा पका दिया तो आख़िरी भाप में बिखर जाएगा।

STEP 66 / 8

मांस, शोरबा और चावल की परतें

पके मेमने के ऊपर आधे उबले बासमती की परत
चावल को शोरबे में न डुबोएँ, मांस पर हल्के से बिछाएँ। भाप के छेद होने से आँच सब जगह पहुँचती है

जिस देग में मांस पकाया, उसमें मांस वापस रखें और 300–350 ml शोरबा रहने दें। ऊपर से आधे उबले चावल हल्के से बिछाएँ, और चॉपस्टिक या लंबी डंडी वाले चम्मच से कुछ जगह भाप के छेद करें। शोरबा चावल को बस हल्का छुए, डुबोए नहीं। दाने कुचलें नहीं, इसलिए 5 मिनट में फुर्ती से परतें लगा लें।

STEP 77 / 8

ढक्कन में कपड़ा लगाकर धीमी आँच पर भाप में पकाना

कपड़ा लिपटे ढक्कन के साथ धीमी आँच पर भाप में पकता काबुली पलाव
कपड़ा ढक्कन की बूँदें सोख लेता है। चावल पर पानी कम गिरता है, इसलिए दाने अलग-अलग रहते हैं

ढक्कन को साफ़ कपड़े में लपेटकर देग पर रखें। मध्यम आँच पर 2–3 मिनट भाप उठने दें, फिर सबसे धीमी आँच पर करके 25 मिनट भाप में पकाएँ। आँच बंद करके 10 मिनट रखा रहने दें। दाने फूलकर लंबे हो जाएँ और तले से जलने की नहीं बल्कि शोरबे की महक उठे, तो पक गया। जलने की चिंता हो तो देग के नीचे जाली रख लें, इससे आँच नरम पड़ती है।

STEP 88 / 8

बड़ी थाली में परोसकर ऊपरी सामान रखना

भाप में पके काबुली पलाव पर गाजर, किशमिश और मेवे बिखेरना
मीठा सामान आख़िर में रखें। चावल में घोलें नहीं, ताकि हर बार परोसने पर स्वाद का हल्का-गाढ़ा अंतर बना रहे

10 मिनट रखने के बाद ढक्कन खोलें और फूले चावल को बड़े हाथ से हल्का फुलाएँ। बड़ी थाली में आधा चावल, फिर मांस, फिर बाक़ी चावल रखें और ऊपर गाजर, किशमिश व मेवे बिखेर दें। मांस थोड़ा दिखता रहे तो खाने वालों को निकालना आसान होता है।

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Ingredients

सामग्री

1 / 3

चावल और मांस

सामग्री मात्रा विकल्प और टिप्पणी
बासमती चावल 2 जापानी चावल-कप (लगभग 300 g) सेला बासमती हो तो सबसे बेहतर, वरना साधारण बासमती। 1 जापानी चावल-कप = 180 ml
मेमने का कंधा या रान 600 g बीफ़ की पिंडली, बीफ़ का कंधा या चिकन की जांघ से बदला जा सकता है
प्याज़ 1 (लगभग 200 g) पतले कटे। मिठास और शोरबे की नींव
लहसुन 2 कलियाँ कुचली हुई। पेस्ट हो तो 2 tsp
पानी 700 ml मांस उबालने के लिए। बीच में और डाल सकते हैं
राइस ब्रैन तेल या सादा तेल 3 tbsp 1 tbsp घी मिला सकते हैं
नमक 2 tsp शोरबे और चावल में बाँटकर डालें
2 / 3

ख़ुशबू के लिए सामग्री

सामग्री मात्रा विकल्प और टिप्पणी
जीरा (साबुत) 1 tsp 1/2 tsp जीरा पाउडर भी चलेगा
इलायची 5 दाने पाउडर हो तो 1/3 tsp। ज़्यादा न डालें
दालचीनी की डंडी 1/2 डंडी डंडी न हो तो थोड़ा-सा पाउडर
काली मिर्च 1/2 tsp दरदरी पिसी
लौंग 2 हो तो डालें। पसंद न हो तो छोड़ दें
चीनी 2 tsp शोरबे में थोड़ी। चावल को रंग और मिठास देती है
3 / 3

गाजर, किशमिश और मेवे

सामग्री मात्रा विकल्प और टिप्पणी
गाजर 2 (लगभग 300 g) 4–5 cm लंबी पतली पट्टियों में
किशमिश 70 g सुल्ताना या सुनहरी किशमिश भी चलेगी
कतरे बादाम 30 g पतली लंबी कतरन हो तो मूल के और क़रीब
पिस्ता 20 g बिना नमक का। न मिले तो बादाम बढ़ा दें
चीनी 1 tbsp गाजर पर चमक के लिए
राइस ब्रैन तेल या मक्खन 1 1/2 tbsp मक्खन की महक तेज़ है, इसलिए थोड़ा ही
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ढक्कन उठाते ही चावल पर चमकती मीठी गाजर

चावल का व्यंजन बनाने के दिन भाप उठते समय मन में थोड़ी घबराहट रहती है। चावल चिपचिपा तो नहीं हुआ? मांस सख़्त तो नहीं रह गया? तली जल तो नहीं गई? काबुली पलाव में ढक्कन उठाते ही यह घबराहट छँट जाती है। लंबे, पतले दानों पर चमकती गाजर, फूली किशमिश और पतली कतरी मेवे सजे होते हैं, और देग के भीतर से मेमने और इलायची की महक उठती है।

काबुली पलाव (Kabuli palaw / Qabili palau / Kabuli pulao) अफ़ग़ानिस्तान का सबसे जाना-माना चावल का व्यंजन है। मेमने या बीफ़ को नरम होने तक पकाया जाता है, उसी शोरबे पर बासमती भाप में पकती है, और ऊपर से मीठी भुनी गाजर, किशमिश, बादाम और पिस्ते रखे जाते हैं। यह भारत की बिरयानी की तरह तेज़ मसालों के दम पर नहीं चलता। मांस के शोरबे, चावल की ख़ुशबू और मीठे सामान की परतों के साथ-साथ खाते जाना ही इसका मज़ा है।

ढक्कन खुली देग में भाप उठाता काबुली पलाव, मेमने का मांस और बासमती दिख रहे हैं
ढक्कन उठते ही मांस का शोरबा सोखे चावल और मीठे ऊपरी सामान की महक उठती है

घर पर बनाते समय मुश्किल कोई अनोखे मसाले खोजना नहीं है। चावल को ज़्यादा न पकाना, मांस का शोरबा न फेंकना, और गाजर-किशमिश को सजावट नहीं बल्कि स्वाद का हिस्सा मानना, यही तीन बातें हैं। इन्हें निभाएँ तो सामान्य दुकान के मेमने या बीफ़ से भी अफ़ग़ान उत्सवी चावल की रूपरेखा बन जाती है।

दक्षिण एशिया के चावल के व्यंजनों में दाल-भात दाल और चावल को रोज़ के खाने के केंद्र में रखता है, जबकि काबुली पलाव मेहमानों और त्योहारों में बीच में रखी जाने वाली बड़ी थाली है। चावल सिर्फ़ मुख्य अनाज नहीं, बल्कि वह मंच है जो मांस, मिठास और ख़ुशबू को थामता है। यही सोच इस रेसिपी में घर की रसोई के हिसाब से मात्राओं में ढाली गई है। चावल के बाद अफ़ग़ान हाथ की कारीगरी की ओर बढ़ना हो, तो जड़ी-बूटी भरे आशक के साथ भाप में पके पकौड़े मंटू भी पढ़ें। बड़ी थाली के व्यंजन से अलग, भरने और चटनी बनाने का तरीक़ा समझ आएगा।

नाम की अलग-अलग वर्तनी

अंग्रेज़ी में Kabuli palaw, Kabuli pulao, Qabili palau जैसी कई वर्तनियाँ मिलती हैं। इस लेख में मुख्यतः "काबुली पलाव" लिखा गया है। दारी और फ़ारसी रूप "पलाव" है, जबकि दक्षिण एशिया की ओर झुकी अंग्रेज़ी वर्तनी में "pulao" या "pilau" लिखा जाता है।


इस व्यंजन की कहानी: काबुल से मेहमान की थाली तक

काबुली पलाव बड़ी थाली में, साथ में दही और सलाद
थाली के बीच चावल का ढेर और चारों ओर दही, सलाद और रोटी रखने से अफ़ग़ान मेहमाननवाज़ी की मेज़ बनती है

काबुली पलाव को अक्सर अफ़ग़ानिस्तान का राष्ट्रीय व्यंजन बताया जाता है। अरामकोवर्ल्ड की रेसिपी-व्याख्या के अनुसार पहले गाजर कद्दूकस करना और मेवे छीलना आसान नहीं था, इसलिए तैयारी में मेहनत लगती थी और यह मुख्यतः रस्मों और उत्सवों में परोसा जाता था। आज घर पर बनाना आसान हो गया है, फिर भी इसकी जगह "दावत के खाने" की ही बनी हुई है।

नाम की व्याख्याएँ कई हैं। एक के अनुसार यह काबुल से आया है। दूसरी में इसे दारी शब्द "क़ाबिल" (सक्षम) से जोड़ा जाता है, कि जो इसे अच्छा बना ले उसे कुशल रसोइया माना जाता था। किसी एक को पक्का मानने के बजाय इसे "राजधानी काबुल का नाम पहने, हुनर दिखाने का चावल" समझना आसान है।

इस व्यंजन की दिलचस्प बात यह है कि इसका वैभव मिर्च या गाढ़ी चटनी से नहीं, बल्कि परतें लगाने के ढंग से आता है। मांस नीचे छिपा रहता है, उसके ऊपर चावल, और सबसे ऊपर मीठी गाजर-किशमिश। खाने वाला पहले सजा हुआ ऊपरी हिस्सा देखता है, और परोसते समय मांस सामने आता है। बड़ी थाली की नाटकीयता पकाने के ढाँचे में ही बुनी है।

मसाले भी संयमित हैं: इलायची, जीरा, दालचीनी, काली मिर्च, कभी-कभी लौंग या तेज़पत्ता। भारतीय चना मसाला की तरह मसालों की महक को आगे नहीं रखा जाता। यहाँ वे मांस के शोरबे और चावल की ख़ुशबू को हल्के से सहारा देते हैं। इन्हें ज़्यादा कर दें, तो यह काबुली पलाव नहीं, मसालेदार पुलाव बनकर रह जाता है।

मीठा सामान सजावट नहीं है

किशमिश और गाजर सिर्फ़ रंग-रूप के लिए नहीं हैं। वे मेमने की चर्बी और चावल के नमक के बीच कौर के बीच में मिठास का मोड़ ला देती हैं। नमकीन चावल पर मीठा सामान पहली बार अटपटा लग सकता है, पर इसी मिठास की वजह से थाली आख़िर तक उबाती नहीं।


सामग्री: आम दुकान से जुटाया काबुली पलाव

काबुली पलाव में काम आने वाले बासमती चावल, मेमना, गाजर, किशमिश, मेवे और मसाले
पहले बासमती, मेमना, गाजर, किशमिश, बादाम और पिस्ता जुटा लें। ख़ुशबू के लिए थोड़े मसाले ही काफ़ी हैं

ख़रीदारी आसान रहती है अगर सामग्री को तीन भागों में बाँटें: चावल, मांस और मीठा ऊपरी सामान। पहली बार में सब कुछ आयातित दुकान से जुटाना ज़रूरी नहीं। पर चावल हो सके तो बासमती ही लें। छोटे दाने के चावल से भी बन जाता है, पर लंबे दाने का हल्कापन हो तो मांस का शोरबा सोखने पर भी चावल भारी नहीं होता।

एलर्जी और खाद्य-सुरक्षा

इस रेसिपी में मेमने या बीफ़ का मांस और मेवे हैं। सोया सॉस नहीं डाला गया है, पर साथ की चीज़ें या बाज़ार का स्टॉक इस्तेमाल करें तो गेहूँ और सोया के लिए लेबल देखें। मांस को बीच तक अच्छी तरह पकाएँ। जापान का स्वास्थ्य, श्रम और कल्याण मंत्रालय मांस को बीच तक पकाकर खाने की सलाह देता है, इसलिए घर पर "स्थानीय अंदाज़ की नरमी" से पहले सुरक्षा देखें।

इस व्यंजन के लिए ज़रूरी सामान

काबुली पलाव का नतीजा चावल और देग पर काफ़ी निर्भर करता है। मेमने की जगह बीफ़ चल सकता है, पर बासमती और मोटे तले की देग जुटाने लायक़ हैं।

ख़रीदारी का सबसे छोटा रास्ता

गाजर, प्याज़, लहसुन, किशमिश और बादाम आम दुकान से लें, और सिर्फ़ बासमती व इलायची दक्षिण एशियाई या मध्य-पूर्वी किराना दुकान या ऑनलाइन से मँगाएँ। जिस दिन मेमना न मिले, बीफ़ की पिंडली या कंधा लें, इससे शोरबे की ताक़त बनी रहती है। चिकन की जांघ से भी बनता है, पर पकाने का समय घटाएँ।


बनाने की विधि: मांस के शोरबे पर चावल की भाप

काबुली पलाव का क्रम यह है: मांस पकाना, चावल को आधा उबालना, परतें लगाकर भाप में पकाना, और आख़िर में मीठा सामान रखना। सब कुछ कुकर में डाल देने से यह ज़्यादा मेहनत माँगता है, पर चावल के दाने और मांस की नरमी को अलग-अलग साधा जा सकता है, इसलिए असल में चूक की गुंजाइश कम रहती है।

प्रेशर कुकर इस्तेमाल करें तो

मेमना या बीफ़ प्रेशर कुकर में 15–20 मिनट के दबाव में काफ़ी जल्दी पक जाता है। पर चावल को कुकर में साथ न पकाएँ। आधा उबालकर सामान्य देग में भाप देने पर दाने ज़्यादा स्थिर रहते हैं। मांस कुकर में, चावल देग की भाप में: घर पर यही बँटवारा सुविधाजनक है।


घर की रसोई में असली स्वाद के क़रीब पहुँचने के विकल्प

काबुली पलाव के विकल्प: मेमना, बीफ़, चिकन, बासमती, छोटे दाने का चावल, गाजर, किशमिश, मेवे
मेमना न हो तो बीफ़ या चिकन चलेगा, पर चावल बासमती हो तो व्यंजन की रूपरेखा बची रहती है

काबुली पलाव में हर सामग्री का मूल जैसा होना ज़रूरी नहीं। फिर भी यह अलग करना चाहिए कि क्या बदला जा सकता है और क्या बचाकर रखना है।

तत्व क्या बचाना है व्यावहारिक विकल्प
चावल लंबा, हल्का दाना जो भाप में भी अलग रहे बासमती। छोटे दाने का चावल हो तो पानी काफ़ी घटाएँ
मांस जिस हिस्से से शोरबे में स्वाद आए मेमने का कंधा, बीफ़ की पिंडली, बीफ़ का कंधा, चिकन की जांघ
ख़ुशबू इलायची और जीरा हल्के से थोड़ा गरम मसाला सहारा दे सकता है, पर ज़्यादा नहीं
मीठा सामान गाजर और किशमिश की मिठास सुनहरी किशमिश, थोड़े सूखे क्रैनबेरी
मेवे सौंधापन और कुरकुरापन सिर्फ़ बादाम भी चलेगा। मूँगफली से स्वाद खिसक जाता है
भाप में पकाना पानी न बढ़ाएँ, शोरबे की महक सोखने दें मोटे तले की देग, मिट्टी की हांडी, या ढक्कन वाली कड़ाही

सबसे ज़रूरी बात यह है कि चावल को शोरबे में "पकाने" की जगह शोरबे के ऊपर "भाप में पकाया" जाए। जापानी मिश्रित चावल की तरह पानी ज़्यादा रखेंगे, तो किशमिश की मिठास और मांस की चर्बी चावल में बहुत उतर जाएगी और नतीजा भारी होगा। चावल हल्का, मांस नीचे, मीठा सामान ऊपर: इसी बँटवारे से बड़ी थाली साफ़-सुथरी खाई जाती है।

मेमना पसंद न हो तो बीफ़ काफ़ी है। बीफ़ की पिंडली में समय लगता है, पर शोरबा दमदार बनता है और चावल से ख़ूब मेल खाता है। बीफ़ के कंधे में उबालने का समय कम लगता है। चिकन की जांघ से हल्का बनता है, पर अफ़ग़ान उत्सवी चावल का भारीपन थोड़ा कम हो जाता है। तब चिकन की खाल न उतारें, ताकि शोरबे में तेल और ख़ुशबू बनी रहे।

मसालों में इलायची और जीरा आधार रहें। गरम मसाला डालना हो तो 1/2 tsp तक। भारतीय व्यंजनों की तरह महकों की परत चढ़ाने पर यह निहारी या बिरयानी की ओर खिसक जाता है। काबुली पलाव में तेज़ ख़ुशबू से ज़्यादा "मांस का शोरबा ओढ़े चावल" की शालीनता बचाना बेहतर है।

छोटे दाने के चावल से बनाएँ तो उसे पूरी नक़ल नहीं, "काबुली पलाव जैसा उत्सवी पुलाव" मानकर चलें। 2 जापानी चावल-कप के लिए शोरबा 240–260 ml तक घटाएँ, आधा उबालना छोड़ दें, चावल को सामान्य तरह धोकर थोड़ी देर भिगोएँ और देग में पकाएँ। दाने अलग-अलग नहीं रहेंगे, पर गाजर और किशमिश का मेल फिर भी मज़ा देगा। पहली बार छोटे दाने के चावल से क्रम सीखकर, पसंद आने पर बासमती पर जाना भी व्यावहारिक रास्ता है।


गड़बड़ियों के कारण: भारी चावल, सख़्त मांस, अलग तैरती मिठास

दाने अलग रहे काबुली पलाव और चिपचिपी असफल थाली की तुलना
काबुली पलाव की गड़बड़ी अक्सर चावल की नमी में दिखती है। दाने अलग रहें तो मांस और मीठा सामान निखरते हैं

चावल चिपचिपा हो तो वजह लगभग हमेशा नमी होती है। चावल ज़्यादा उबल गया, शोरबा ज़्यादा डाला गया, या भाप के दौरान ढक्कन की बूँदें चावल पर टपक गईं। आधा उबालना तब रोकें जब "थोड़ी कच्ची परत बची हो"। देग में शोरबा चावल को डुबोने जितना नहीं, तले पर थोड़ा दिखने भर का हो। कपड़ा बूँदें सोखने के लिए लगाया जाता है।

मांस सख़्त हो तो भूनने के बाद उबालना कम पड़ा। मेमने के कंधे या बीफ़ की पिंडली में सतह पर आँच पहुँचती है, पर भीतर के रेशे नहीं खुलते। चॉपस्टिक से ज़ोर से दबाने पर बिखरने से ज़रा पहले तक उबालें, फिर चावल की परत लगाएँ। सिर्फ़ भाप से मांस को नरम करना मुश्किल है, इसलिए मांस उबालने का चरण अलग से पूरा करें।

मिठास अलग तैरती लगे तो अक्सर गाजर-किशमिश भूनने में तेल कम था या नमक कम था। मीठे सामान को चावल में न मिलाएँ, ऊपर रखें। परोसने पर नमकीन चावल, मांस और मीठी गाजर एक ही थाली में मिलें, यही आदर्श है। सब मिला दें तो वह मीठे पुलाव जैसा लगने लगता है।

ख़ुशबू करी जैसी लगे तो गरम मसाला या हल्दी ज़्यादा पड़ी है। काबुली पलाव के चावल के लिए गाढ़ा पीला नहीं, हल्का सुनहरा रंग काफ़ी है। इलायची, जीरा और दालचीनी थोड़ी रखें और मिर्च या करी पाउडर न डालें, तब स्वाद एकजुट रहता है।

तली जल जाए तो भाप शुरू करते समय आँच तेज़ थी। भाप उठाने के लिए मध्यम आँच 2–3 मिनट काफ़ी है, उसके बाद सबसे धीमी आँच। मोटे तले की देग में भी डर हो, तो चूल्हे पर जाली रखकर देग उस पर रखें, ताकि आँच एक जगह जमा न हो।

कपड़ा इस्तेमाल करते समय सावधानी

ढक्कन पर कपड़ा लपेटें तो उसके सिरे ऊपर कसकर बाँध दें, ताकि आँच को न छुएँ। गैस की आँच पर ख़ास सावधानी रखें। चिंता हो तो कपड़े के बिना, ढक्कन को एक बार पोंछकर धीमी आँच पर भाप में पकाना भी ठीक है।


कैसे परोसें और खाएँ: दही और खट्टापन साथ में

एक व्यक्ति के लिए परोसा काबुली पलाव, साथ में दही, सलाद, नींबू, हरी जड़ी-बूटी और चपटी रोटी
दही, सलाद, नींबू और हरी जड़ी-बूटियाँ बग़ल में हों तो चावल और मांस का भारीपन हल्का हो जाता है

काबुली पलाव बड़ी थाली में परोसा जाए तो सबसे सुंदर लगता है। चावल का ढेर बनाएँ, ऊपर गाजर, किशमिश और मेवे बिखेरें, और मांस थोड़ा-सा दिखने दें। खाने वाला चम्मच से खोदे तो नीचे से मांस निकलता है। "दिखता हुआ" और "छिपा हुआ" हिस्से का यही फ़र्क़ इसे मेहमानों का व्यंजन बनाता है।

साथ में गाढ़े साइड व्यंजनों से ज़्यादा हल्की चीज़ें जमती हैं: सादे दही में नमक और खीरा मिलाकर बना झटपट रायता, टमाटर-खीरा-प्याज़ का सलाद, नींबू और हरी जड़ी-बूटियाँ। चावल और मांस में मिठास पहले से है, इसलिए बग़ल में खट्टा और ठंडा रखने से खाते जाना आसान रहता है।

मेज़ का मौक़ा मेल मक़सद
आम दिन का रात का खाना काबुली पलाव + खीरे वाला दही + अफ़ग़ान सलाद चावल और मांस को मुख्य रखें और कटी सब्ज़ियों के खट्टेपन से भारीपन काटें
सप्ताहांत के मेहमान काबुली पलाव + चपटी रोटी + अफ़ग़ान सलाद + चाय बड़ी थाली को केंद्र में रखकर बाँटकर परोसने का मज़ा बनाएँ
बनाने के अगले दिन दोबारा गरम चावल-मांस + नींबू + हरी जड़ी-बूटी किशमिश की मिठास को खट्टेपन से कसें और भारीपन घटाएँ

मेहमानों के दिन थालियाँ बढ़ाने से बेहतर है कि परोसने का क्रम सोचा जाए। पहले चावल और मांस थोड़ा ज़्यादा लें, फिर थोड़ी गाजर और किशमिश, और आख़िर में दही बग़ल में। सब एक साथ मिलाने के बजाय मुँह में बारी-बारी से मिठास, नमक और खट्टापन आए, तो काबुली पलाव की ख़ूबी उभरती है।

चावल के दूसरे व्यंजनों से तुलना करनी हो, तो मसालों की परतों वाली बिरयानी, दाल और चावल की शांत खिचड़ी (जापानी में) और नेपाल की रोज़ की दाल-भात की ओर बढ़ें। दक्षिण एशिया के आसपास की चावल-संस्कृतियों का फ़र्क़ दिखेगा। इन सबमें काबुली पलाव की अनोखी बात है कि मीठा सामान और मांस का शोरबा एक ही बड़ी थाली में आ जाते हैं।

पेय के साथ परोसना हो तो चावल कम और दही-सलाद ज़्यादा रखें। मेमने की चर्बी और किशमिश की मिठास के कारण बीयर से ज़्यादा हल्की रेड वाइन, सूखी वाइट वाइन या गरम चाय मेल खाती है। घर के रात के खाने में अलग सूप बनाने के बजाय, थोड़ा मांस का शोरबा निकालकर नमक ठीक करें और छोटे कटोरे में साथ परोस दें, तो थाली पूरी लगती है।


रखना और अगले दिन दोबारा गरम करना

काबुली पलाव के चावल, मांस, गाजर-किशमिश और दही को अलग-अलग रखा हुआ
चावल, मांस और मीठा सामान हो सके तो अलग रखें। दोबारा गरम करते समय थोड़ा शोरबा डालें, तो सूखता नहीं

काबुली पलाव बनते ही सबसे अच्छा लगता है, पर अलग-अलग रखा जाए तो अगले दिन भी स्वादिष्ट रहता है। बचने की बात यह है कि थाली के बचे हिस्से को सीधे गहरे डिब्बे में ठूँस न दें। चावल की भाप फँस जाती है, गाजर-किशमिश की नमी चावल में उतर जाती है और सब भारी हो जाता है।

हो सके तो चावल, मांस और ऊपरी सामान अलग करें। चावल को उथले डिब्बे में फैलाएँ, गुनगुना ठंडा होने पर फ़्रिज में रखें। मांस थोड़े शोरबे के साथ दूसरे डिब्बे में। गाजर और किशमिश अलग डिब्बे में, जिन्हें गरम करने के अंत में ऊपर रखें। फ़्रिज में रखा हो तो अगले दिन तक खा लें।

गरम करते समय चावल पर 2–3 tsp शोरबा या पानी छिड़कें, ढककर माइक्रोवेव में गरम करें। मांस को शोरबे समेत गरम करें और आख़िर में चावल के ऊपर रखें। ऊपरी सामान को थोड़ी देर कमरे के तापमान पर आने दें, या माइक्रोवेव में थोड़ा गरम करें। सबको साथ तेज़ गरम करने पर किशमिश बहुत गरम हो जाती है और चावल कुचलने लगता है।

बचे चावल को अगले दिन फ़्राइड राइस बनाने से बेहतर है कि दही और सलाद के साथ दोबारा काबुली पलाव की तरह खाया जाए। फिर भी दूसरा व्यंजन बनाना हो, तो मांस को बारीक रेशों में चीरें, चावल के साथ हल्का भूनें और आख़िर में नींबू निचोड़ें, भारीपन निकल जाएगा। बस ज़ोर से भूनने पर बासमती की ख़ुशबू उड़ जाती है।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

काबुली पलाव के सवालों के लिए रखा मांस, बासमती, छोटे दाने का चावल, गाजर और किशमिश
आम सवाल मांस के विकल्प, चावल की नमी, भंडारण और मीठे सामान के इस्तेमाल के आसपास घूमते हैं

Q1. मेमना पसंद न हो तो भी बन सकता है?

हाँ। बीफ़ की पिंडली या कंधा लेने पर शोरबे का स्वाद निकलता है और चावल से मेल खाता है। चिकन की जांघ से भी बनता है, पर उबालने का समय 25–30 मिनट तक घटाएँ और खाल समेत पकाएँ, ख़ुशबू बची रहती है। सूअर का मांस अफ़ग़ान खान-पान की परंपरा से अलग है, इसलिए इस व्यंजन को दोहराने के लिए उसकी सलाह नहीं देता।

Q2. बासमती न हो तो छोटे दाने के चावल से बन सकता है?

बन सकता है, पर वह दूसरा व्यंजन हो जाता है। छोटे दाने का चावल चिपचिपा होता है और शोरबा सोखकर भारी हो जाता है। उससे बनाएँ तो आधा उबालना छोड़ें, शोरबा काफ़ी घटाएँ और देग में पकाएँ। काबुली पलाव की झलक चाहिए तो सिर्फ़ चावल के लिए बासमती जुटा लेना सबसे छोटा रास्ता है।

Q3. क्या किशमिश डालना ज़रूरी है?

ज़रूरी नहीं, पर डालने से व्यंजन का चेहरा बनता है। पसंद न हो तो मात्रा आधी करें और गाजर थोड़ी बढ़ा दें। थोड़े सूखे क्रैनबेरी मिलाने से खटास आती है, पर अफ़ग़ान स्वाद से थोड़ा दूर हो जाता है।

Q4. क्या राइस कुकर में बन सकता है?

मांस उबालने के बाद चावल कुकर में पकाने वाला सरल रूप संभव है। पर आधे उबले चावल की भाप वाली विधि से बनावट बदल जाएगी। कुकर इस्तेमाल करें तो 2 जापानी चावल-कप बासमती के लिए शोरबा सामान्य सफ़ेद चावल से कम रखें और ऊपरी सामान पकने के बाद रखें।

Q5. तीखा चाहिए तो क्या मिर्च डाल सकते हैं?

डाल सकते हैं, पर काबुली पलाव का केंद्र तीखापन नहीं है। तीखापन चाहिए तो उसे चावल में मिलाने के बजाय बग़ल में हरी मिर्च का अचार या तीखी चटनी रखें, इससे व्यंजन की रूपरेखा नहीं बिगड़ती।


समेटते हुए

चम्मच में उठाया काबुली पलाव, एक कौर में चावल, मेमना, गाजर, किशमिश और मेवे
चावल, मांस, मिठास और ख़ुशबू एक कौर में मिलते हैं। काबुली पलाव परतों में खाया जाने वाला व्यंजन है

काबुली पलाव तेज़ तीखेपन से छाप नहीं छोड़ता। मेमना उबालने के शोरबे पर चावल भाप में पकता है, ऊपर मीठी गाजर और किशमिश आती है, और मेवे सौंधापन जोड़ते हैं। करना सरल है, पर चावल, मांस और मिठास को ज़्यादा घोले बिना परतों में रखने से यह उत्सव की थाली बन जाती है।

घर की रसोई में बचाने लायक़ बातें हैं: बासमती इस्तेमाल करना, चावल को मांस का शोरबा सोखने देना और ऊपरी सामान आख़िर में रखना। मेमने के बिना बीफ़ से भी बनता है, और इलायची-जीरा हों तो ख़ुशबू काफ़ी उठ जाती है। पहली बार चरण बहुत लगते हैं, पर मांस उबलते समय चावल और गाजर तैयार करें तो रसोई का सिलसिला हैरानी की हद तक साफ़-सुथरा चलता है।

दक्षिण एशिया के चावल के व्यंजन आगे बढ़ाने हों, तो ख़ुशबूदार बिरयानी, दाल-चावल से बनी खिचड़ी (जापानी में) और रोज़ के खाने की दाल-भात आज़माएँ। एक ही चावल को भी हर देश में "मिलाना", "भाप देना" या "साथ परोसना" की अलग सोच से बरता जाता है। काबुली पलाव इस फ़र्क़ को एक थाली में मज़ेदार ढंग से दिखाता है।


संदर्भ

संदर्भ का दायरा

नाम, सामग्री की बनावट, कपड़े से भाप में पकाने और गाजर-किशमिश के इस्तेमाल की जाँच के लिए अंग्रेज़ी की रेसिपी और खान-पान संस्कृति की व्याख्याएँ देखी गईं। सिर्फ़ खाद्य-सुरक्षा के लिए जापान की सरकारी जानकारी देखी गई है।

  • AramcoWorld: Flavors: Rice with Carrots and Raisins (Kabuli Palaw): पारवाना से आई सामग्री, विधि और उत्सवी व्यंजन के रूप में स्थान की जाँच
  • SBS Food: Afghan lamb pilaf (Kabuli pulao): मेमना, सेला बासमती, कैरेमल की महक और कपड़े से भाप में पकाने की विधि की जाँच
  • Afghan Cooks: Kabuli pulao recipe - Afghan National Dish: अफ़ग़ान घरेलू व्यंजन के रूप में नाम, भंडारण और परोसने के विचार की जाँच
  • TasteAtlas: Kabuli pulao: काबुली पलाव / Qabili palau नाम, राष्ट्रीय व्यंजन के रूप में परिचय और सामग्री की बनावट की जाँच

खाद्य-सुरक्षा की दृष्टि से, पकाते समय इसे भी देखा गया।